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विश्वास पर आस की कहानी है ‘द सेंट ऑफ वरेट’ 

जब पूरा विश्व कोरोना महामारी के चपेट में आया, तो पूरी दुनिया को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। इस आपदा से भारत भी अछूता नहीं रहा। जनसंख्या की दृष्टि से समृद्ध हमारे देश में कोरोना के कारण लोगों अधिक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। देश में लॉक डाउन लगने के कारण भीड़भाड़ वाली जगहों को पूर्णरूप से प्रतिबंधित कर दिया गया। खास कर यदि मनोरंजन उद्योग की बात करें तो, विशेष रूप से बॉलीवुड में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए और फिल्म उद्योग के मध्य और निचले स्तर के तकनीशियनों और अभिनेताओं का रोजगार ही छीन गया। चूंकि शूटिंग रद्द या स्थगित कर दी गई थी और क्रू में अत्यधिक कटौती की जा रही थी, इस उद्योग पर निर्भर बहुत से लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ा। इसी तरह की वास्तविक स्थिति को लेखक-निर्देशक मुन्नावर भगत ने अपने हिंदी फिल्म ‘द सेंट ऑफ वरेट’ में दिखने का प्रयास किया है। इसमें महामारी के दौरान गुजर रहे बुरे हालातों के परिणामों के मध्य लोगों के सकारात्मक पहलुओं और जीवन के संघर्ष के बीच उत्पन्न उम्मीद की किरण को दिखाने का प्रयास किया है।

कोरोना महामारी अभी भी लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। हमारा देश भी इस अवस्था से पूर्णतया बाहर नहीं आया है। लोगों को मुख्य रूप से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अब भी आवश्यकता है। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान भी आवश्यक है। अज्ञात डर ने लोगों के जीवन को जकड़ लिया है और उनमें से बहुत से लोग इन दिनों आध्यात्मिक मार्ग की दिशा में अग्रसर हैं। कोई अपने भविष्य आगे क्या होगा यह नहीं जान सकता और अनिश्चितता की वजह से ही लोग आध्यात्मिक की ओर बढ़ रहे हैं।
फ़िल्म की कहानी एक युवा की है जो बॉलीवुड बिरादरी का हिस्सा है, जो अपने जीवन की स्थिति से निराश होकर अपने मूल स्थान पर लौटता है। भविष्य के लिए उसके सामने कुछ भी अच्छा नहीं होने और वर्तमान स्थिति काफी पीड़ादायक होने के कारण, वह अपना जीवन समाप्त करने का फैसला करता है। लेकिन नियति के मन में कुछ और ही है। वह अपनी जीवन में एक तरह के चमत्कार का सामना करता है और देखता है कि उसका जीवन पटरी पर लौट रहा है। वह अपने अनुभवों को साझा करके समाज की मदद करने का फैसला करता है और यही सोच ‘द सेंट ऑफ वेरेट’ फिल्म में दिखाया गया है। यह फ़िल्म जीवन के पड़ावों का सामना करते हुए सर्वशक्तिमान में विश्वास करने के महत्व को दर्शाती है। फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है और यह पोस्ट-प्रोडक्शन में चली गई है।

निर्माता-निर्देशक मुन्नावर भगत है जो इससे पहले ‘लाखों है यहां दिलवाले’, ‘निवडुंग’ और ‘गाव पुधे आहे’ जैसी प्रेरक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फ़िल्म ‘द सेंट ऑफ वरेट’ का निर्माण और निर्देशन इन्होंने किया है। कहानी, पटकथा और संवाद भी इन्होंने ने ही लिखे हैं। डीओपी अरविंद सिंह पुवार हैं और संगीत अमित अनिल बिस्वास ने दिया है। मान बी रोका संपादक हैं। फिल्म में विजे भाटिया मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, उनके साथ नवोदित कलाकार रोशनी चौबे, प्रसाद माली, मानसी पारेख, शाल्वी शाह रेवती अय्यर और मुन्नावर भगत महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाते दिखाई देंगे।

फ़िल्म ‘द सेंट ऑफ वरेट’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

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