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अखिल भारतीय संस्था “काव्य सृजन ” का पंजीयन उत्सव अद्भुत और अनोखे अंदाज में संपन्न

मुम्बई: विगत रविवार काव्य सृजन के इतिहास का स्वर्णिम रविवार बन गया।
इसी दिन काव्य सृजन के अध्यक्ष पं. शिवप्रकाश ” जमदग्निपुरी ” को एड. राजीव मिश्र ने संस्था का पंजीकरण प्रमाण पत्र सौंपा और आज ही के दिन पं.शिवप्रकाश जौनपुरी ने अपना नाम जौनपुरी से बदलकर”जमदग्निपुरी”नाम की घोषणा की।
किसी साहित्यिक संस्था की मासिक गोष्ठी सह पंजीयन उत्सव को पूर्ण रूपेण भारतीय संस्कृति, संस्कार से सम्बद्ध करना बड़ा अद्भुत रहा और काव्य सृजन तो मात्र कवि गोष्ठी ही नहीं अपने अलग अलग प्रकार की प्रयोगात्मक गतिविधियों से पहले ही मुम्बई ही नहीं भारत के अनेक स्थानों पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है और अद्भुत परिकल्पनाओ, आयोजनों से हिन्दी ही नहीं सभी भारतीय भाषा भाषियों की चहेती संस्था बन गई है।
इस बार के आयोजन का प्रथम सत्र प्रभु सत्य नारायण भगवान की कथा से प्रारम्भ हुआ, आचार्य थे स्वयं संस्था अध्यक्ष पं. शिवप्रकाश “जमदग्निपुरी ” और यजमान बने उपाध्यक्ष जिलाजीत यादव जो सपरिवार, इष्ट मित्रों और स्थानीय निवासी तथा संस्था के पदाधिकारियों सहित पूजन – हवन में सम्मिलित रहें।
द्वितीय सत्र में पं. श्याम प्रकाश पाण्डेय, अरविन्द मिश्र, सुमेर प्रसाद आदि की अगुवाई में सभी ने संगीतमय स्वर लहरी पर झूमते सुन्दर कांड का पाठ संपन्न किया।
इस प्रकार भक्तिभाव से आगे बढ़ते आयोजन अपने चरम उत्कर्ष नियमित मासिक गोष्ठी के तृतीय सत्र तक आ पहुंचा, इसकी अध्यक्षता अनुष्का पत्रिका के सम्पादक वरिष्ठ कवि आ. रासबिहारी पाण्डेय ने एवम संचालन प्रा. अंजनी कुमार द्विवेदी “अनमोल रसिक ” जी द्वारा किया गया।
इन सत्रों में के. पी. एम. स्कूल के प्रधानाध्यापक व ट्रस्टी आ. डॉ. मिथिलेश पाण्डेय जी का सुखद सानिध्य प्राप्त रहा।
यह कार्यक्रम एक तो पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त होने दूसरे संस्था द्वारा अपने सदस्यों के सहयोग से अपनी स्वयं की कुर्सीयों की प्राप्ति हेतु स्मरणीय रहेगा।
कवि सम्मलेन में सर्वश्री पं. शिवप्रकाश “जमदग्निपुरी”, आनन्द पाण्डेय ” केवल “, संदीप राजा, सत्येंद्र सोनकर, पं. श्रीधर मिश्र, वीरेंद्र कुमार यादव, अनमोल रसिक, एड. राजीव मिश्र आदि ने शिक्षक लाल बहादुर यादव “कमल”, माताप्रसाद शर्मा, कल्पेश यादव, जवाहरलाल यादव, राजेश उपाध्याय आदि के साथ अपनी स्वरचित नवीनतम समसामयिक रचनाएँ बेहद सुन्दर अनुशासित तरीके से प्रस्तुत करते आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान कर दिया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में रासबिहारी ने सभी उपस्थित पदाधिकारियों के संस्था के प्रति समर्पण भाव की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते, इसी प्रकार आगे बढ़ते जाने की मँगल कामनाओं के साथ कहा कि आज इस संस्था ने सामान्य कवि गोष्ठी न करके सभी सामाजिक संस्थाओ को भारतीय संस्कारो, संस्कृति और परम्परा द्वारा अपनी जड़ों से सदैव जुड़े रहने का जो अद्भुत सन्देश और प्रेरणा दी है वह अद्भुत है।
यह किसी साहित्यिक संस्था द्वारा स्थानीय लोक जीवन को जोड़ने , संस्कारित किये जाने वाला पहला आयोजन मुम्बई में है।
गोष्ठीयां करते कविताएं सुनने सुनाने वाली संस्थाएं तो हर गली मोहल्ले में है, परन्तु इस प्रकार अपनी माटी, अपने संस्कारो को लोकजीवन में पुनर्स्मरण कराते आगे बढ़ने वाली यह पहली संस्था है,जों इन सब के साथ हिन्दी ही नहीं अन्य भारतीय भाषाओं से भी हिलमिल कर आगे बढ़ रही है और अन्य सभी संस्थाओ के लिए प्रकाश स्तम्भके रूप में जानी जाती है। इन सब के लिए संस्था के सभी पदाधिकारी साधुवाद के पात्र है।
अंत में संस्था के उपाध्यक्ष जिलाजीत यादव ने सभी अतिथियों, कवियों, पदाधिकारियों का इतने समय तक उपस्थिति और सफल यादगार कार्यक्रम के आयोजन हेतु आभार व्यक्त करते सभी को स्नेहिल आग्रह पूर्वक प्रभु प्रसाद के साथ महाप्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण के उपरांत ही जाने की अनुमति प्रदान की। साथ ही पुनः इसी प्रकार के आयोजन बार बार करते रहने और सभी की उपस्थिति का विशेष आग्रह करते वन्दन, अभिनन्दन कर विदा किया।
काव्य सृजन द्वारा विषय, विधा आधारित काव्य संकलनों के अतिरिक्त अपने सभी सदस्यों की एकल पुस्तकें संस्था के सहयोग से प्रकाशित कराने की योजना को सभी उपस्थित जनों ने सराहते इसे संस्था की विशेष उपलब्धि बताया और आशा व्यक्त की कि यह क्रम सतत जारी रहेगा।

-गायत्री साहू

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