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कैलाश नाथ गुप्ता जी की कविता – इंसानियत रूहानियत ,संग संग हो ,सुखमय होगा ,कुल संसार,

७५वा निरंकारी संत समागम

इंसानियत रूहानियत ,संग संग हो ,सुखमय होगा ,कुल संसार,

{१}
इंसानियत रूहानियत ,संग संग से ही, बढ़ेगा जग में, प्रीति और प्यार,
अमन चैन ,आ जाए दिलों में, टूटे नफरत, की दीवार,
अपनेपन का ,भाव जगेगा, लगेगा अपना, कुल संसार,
वसुधैव कुटुंबकम् का, सपना फिर, तब जाकर, होगा साकार,

हर भाषा, हर देश के मानव, अपना ही तो, है परिवार
इंसानियत रूहानियत ,संग संग हो, सुखमय होगा , कुल संसार,

{२}
सुखों की चाहत, रखने वालों, अपने दिल से ,करें विचार,
सुख का स्रोत ,बस केवल प्रभु हैं, वेद ग्रंथ की जानें सार,
कण कण में, बस एक प्रभु है, किए हैं जो ,प्रभु का दीदार,
उनका जीवन ,हुआ है सुख मय, हुआ है उनका , ही उद्धार,

जीवन के हर ,प्रश्न का उत्तर, देते हैं ,सतगुरु साकार,
इंसानियत रूहानियत ,संग संग हो, सुखमय होगा , कुल संसार,

{३}
संत सतगुरु ,ईश्वर दर्शन का, मार्ग , रूहानियत वाला है,
इस मार्ग पर ,चलने वाला, दुनिया से ,निराला है,
सुख और दुख, से परे हैं वो, सहज ,अवस्था वाला है,
उनसे ही ,कायम है धरती ,जो इंसानियत वाला है,

“कैलाश” बने ,इंसान ऐसा , दिल में रहे ,प्यार ही प्यार,
इंसानियत रूहानियात संग संग हो, सुखमय होगा, कुल संसार,

🙏 धन निरंकार जी 🙏

कैलाश नाथ गुप्ता , अंधेरी मुंबई 9324673661

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