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लव जिहाद की मानसिकता और बदलते भारत की समस्या का मूल और बचाव के जरूरी उपाय।

सोशल मीडिया पर इस वक्त लव जिहाद शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहा है इसकी वजह दिल्ली के महरौली में हुई श्रद्धा की हत्या है इस केस ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद जिस वीभत्स तरीके से लाश के 35 टुकड़े करके ठिकाने लगाया गया, उससे जानने के बाद लोगों का दिल दहल उठा है। लोग इस केस के लिए लव जिहाद को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका मानना है कि कथित प्रेमी आफताब पूनेवाला ने लव जिहाद की वजह से अपनी प्रेमिका श्रद्धा मदन वॉकर की हत्या की है।

बताते चले की लव जिहाद सबसे पहले साल 2008/09 में सुनने में आया था। केरल में बड़ी संख्या में हिंदू और ईसाई लड़कियों के प्रेम जाल में फंसाकर शादी के बहाने धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। लव जिहाद दो शब्दों से बना है। लव एक अंग्रेजी शब्द है। इसका हिंदी मतलब प्यार होता है। जिहाद अरबी शब्द है इसका हिंदी मतलब किसी खास मकसद के लिए युद्ध करना होता है। आखिर इसके पीछे कौनसी मानसिकता है और कौन–कौन से कारण है? किस तरह से बचाव किया जा सकता है? जिसपर फिल्मों से लेकर विश्व हिंदू परिषद् और आम जनमानस के विचार कुछ इस प्रकार है।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने लव जिहाद की शिकार लड़कियों की आत्महत्या, हत्या और दुर्दशा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हुए सरकार से कठोर कानून बनाने की मांग की है। विश्व हिंदू परिषद ने लव जेहाद के 170 मामलों की सूची भी जारी की है।

विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने कहा कि लव जेहाद की घटनाओं की झड़ी सी लग गई है। लखनऊ में एक पीड़ित महिला का आत्मदाह करना हो या सोनभद्र में पीड़िता का सिर कटा शव मिलना हो, पिछले 8-10 दिन से बड़ी संख्या में ये घटनाएं सामने आ रही हैं जो किसी पत्थर दिल व्यक्ति का दिल दहलाने के लिए भी पर्याप्त हैं। केरल से लेकर जम्मू कश्मीर और लद्दाख तक इन षड्यंत्रकारियों का एक जाल बिछा हुआ है। गैर मुस्लिम लड़कियों को योजनाबद्ध तरीके से जबरन या धोखे से अपने जाल में फंसा लेना किसी सभ्य समाज का चिंतन नहीं हो सकता। यह केवल जनसंख्या बढ़ाने का भोंडा तरीका ही नहीं, अपितु आतंकवाद का एक प्रकार भी है।

विहिप नेता ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय ने इसे धर्मांतरण का सबसे घिनौना तरीका बता कर ही इसे लव जिहाद नाम दिया था। विश्व हिंदू परिषद ने पिछले आठ से दस वर्षों में संज्ञान में आईं 170 घटनाओं की सूची बनाई है। डॉ. सुरेंद्र जैन ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष 20,000 से अधिक गैर मुस्लिम लड़कियां इस षड्यंत्र का शिकार बन जाती हैं। जाल में फंसने के बाद इन लड़कियों का न केवल जबरन धर्मांतरण होता है, बल्कि नारकीय जिंदगी जीने पर मजबूर किया जाता है। वेश्यावृत्ति करवाने और उन्हें बेच देने की घटनाओं के अलावा पूरे परिवार के पुरुषों व मित्रों के साथ जबरन यौन शोषण की घटनाएं भी समाचार पत्रों में आती ही रहती हैं। जब इन अमानवीय यातनाओं की अति हो जाती है तो ये लड़कियां आत्महत्या के लिए विवश हो जाती हैं परंतु पुलिस में शिकायत करने का अवसर बहुत कम लड़कियों को मिल पाता है। एक न्यायालय ने तो अपनी टिप्पणी में पूछा भी था कि लव जेहाद की शिकार लड़कियां गायब क्यों हो जाती है?

लव जिहाद (जिसे रोमियो जिहाद) के नाम से भी जाना जाता है एक इस्लामोफोबिक षड्यन्त्र का सिद्धान्त जो की भारत अथवा गैर मुस्लिम देशों में प्रचलित है। जिसके अंतर्गत माना जाता है यह षड्यन्त्र सिद्धान्त का कहना है कि मुस्लिम पुरुषों गैर-मुस्लिम समुदायों से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए लक्षित करते हैं। यह 2009 में भारत में राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार केरल और उसके बाद कर्नाटक में राष्ट्रीय ध्यानाकर्षण की ओर बढ़ी। नवंबर 2009 में, पुलिस महानिदेशक जैकब पुन्नोज ने कहा कि कोई ऐसा संगठन है जिसके सदस्य केरल में लड़कियों को मुस्लिम बनाने के इरादे से प्यार करते थे। दिसंबर 2009 में, न्यायमूर्ति के.टी. शंकरन ने पुन्नोज की रिपोर्ट को स्वीकार कर दिया और निष्कर्ष निकाला कि जबरदस्ती धर्मांतरण के संकेत हैं। अदालत ने “लव जिहाद” मामलों में दो अभियुक्तों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में इस तरह के 3,000 – 4,000 मामले सामने आये थे।

लव-जिहाद का मुद्दा भी सबसे पहले दिग्गज वामपंथी नेता वीएस अच्युतानंदन ने 2010 में पहले उठाया था।फिर केरल के ही कांग्रेसी मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने 25 जून, 2012 को विधानसभा में बताया कि गत छह वर्षों में वहां 2,667 लड़कियों को इस्लाम में धर्मांतरित कराया गया। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित कानून, जिसमें “गैरकानूनी धर्म परिवर्तन” के खिलाफ प्रावधान भी शामिल हैं, एक विवाह को शून्य और शून्य घोषित करता है यदि एकमात्र इरादा “एक लड़की के धर्म को बदलने” का था और यह और मसौदा विधेयक मध्य प्रदेश में सजा का प्रस्ताव रखता है कानून तोड़ने वालों को 10 साल की जेल का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में कानून को गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण अध्यादेश के निषेध के रूप में 28 नवंबर को मंजूरी दी गई थी। मध्य प्रदेश में कानून को दिसंबर 2020 में मंजूरी दी गई थी।

वही विहिप ने कहा कि अब विश्व के कई देश इससे त्रस्त होकर आवाज उठाने लगे हैं। म्यांमार की घटनाओं के मूल में भी लव जिहाद ही है। श्रीलंका में 10 दिन की आंतरिक एमरजेंसी लगाकर वहां के समाज के आक्रोश को शांत करना पड़ा था। लव जिहाद की फंडिंग के समाचार सामने आ रहे हैं। पीएफआई, सिमी, आईएसआई जैसी संस्थाएं इनके पीछे हैं। इसीलिए कहीं भी मामला बढ़ने पर बड़े वकील तुरंत इनकी पैरवी के लिए खड़े हो जाते हैं जिनको लाखों-करोड़ों रुपए फीस के रूप में दिए जाते हैं। केरल की हादिया का उच्चतम न्यायालय में एक बड़े वकील द्वारा बड़ी फीस लेने का उदाहरण सबके सामने है।

इस तरह लव जिहाद में किसी खास धर्म के लोग दूसरे धर्म की लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करते हैं। इस शब्द के ईजाद होने से पहले भी इस तरह की घटनाएं समाज में होती रहती थीं यही वजह है कि सिनेमा में भी इसकी झलक देखने को मिलती है। पिछले कुछ वर्षों में तो लव जिहाद को आधार बनाकर भी कई फिल्मों का निर्माण किया गया है। इनमें एक फिल्म ‘द कन्वर्जन’ का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। ‘द कन्वर्जन’ इसी साल 6 मई को सिनेमाघरों में रिलीज की गई थी। इस फिल्म में दिखाया गया था कि किस तरह से हिंदू लड़कियों का प्यार और शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर विवाद भी हुआ था। एक तरह बीजेपी जैसी भगवा पार्टियों ने इसका समर्थन किया था, तो दूसरी विपक्ष के कई दलों ने विरोध किया था। आइए ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में जानते हैं।

भारत में सिनेमा का बहुत प्रभाव है जो ईर्द गिर्द देखने को भी मिलता है जिसे देखते समय आम दर्शक काल्पनिक दुनिया से खुद को जुड़ा पता है और उस तरह की कल्पना को जीवित करने का प्रयास करता है जिसमे प्यार से जुड़ी कहानियों ने तो मानो भारत के संस्कृति और संस्कार का इस तरह से हनन किया है जिसका कोई जवाब नही है। जहां पर पुजारी को पाखंडी, झूठा और राजपूतों को बलात्कारी, भगवान की पूजा करना मतलब अंध विश्वास।कहते है की किसी झूठ को बार बार बोलने से सच लगने लगता है। वही हुआ हिंदू संकृति और संस्कार का जितना नुकसान इन फिल्मों ने किया किसी ने नहीं किया। अगर कोई सच बोल दे तो कट्टर कहा जाता है। हालाकी कुछ मुट्ठीभर लोगो ने सच दिखाने का भी जोखिम लिया जो बॉलीवुड में पैर जमाए हस्तियों को अच्छी नहीं लगी। उसी कड़ी में बॉलीवुड की कुछ सच से प्रेरित फिल्मे बनी जिससे समाज को सजग और जागरूक किया जा सके। जिनमे लव जिहाद का दंश दिखा।

इसमें द कन्वर्जन फिल्म में दिखाया गया कैसे लोग तिलक कलावा बांधकर, हिंदुओं के बेटियों के साथ छलावा करते हैं, वो लोग सुधर जाएं, क्योंकि देश का हिंदू जाग चुका है”। फिल्म ‘द कन्वर्जन’ के इस डायलॉग से इसकी कहानी को समझ सकते हैं। फिल्म में प्रेम त्रिकोण दिखाया गया है। एक हिंदू लड़की कॉलेज में पढ़ती है। उसे एक मुस्लिम और हिंदू लड़का दोनों प्यार करने लगते हैं लेकिन मुस्लिम लड़का अपना नाम बदलकर उसके साथ रहता है। संस्कृत के श्लोक सुनाकर उसे प्रभावित करता है। लड़की उसके जाल में फंसकर परिवार से बगावत कर देती है। उसका कहना होता है, ‘हर मुसलमान बुरा नहीं होता है’। इसके बाद मुस्लिम लड़के से शादी कर लेती है। उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जाता है। इंकार करने पर अत्याचार किया जाता है। अंत में उस लड़की को समझ में आ जाता है कि वो जाल में फंस चुकी है। इसके बाद अपने एक हिंदू दोस्त की सहायता से उस जाल से निकल जाती है। उसे मारने की कोशिश की जाती है। लेकिन परिवार और दोस्त मिलकर बचा लेते हैं। लड़की लव जिहाद के प्रति जागरूकता अभियान शुरू कर देती है। इस फिल्म में उस हकीकत को दिखाने की कोशिश की गई है, जिसे कई बार खबरों में देखा और पढ़ा गया है। विनोद तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विन्ध्या तिवारी, प्रतीक शुक्ला और रवि भाटिया जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं।

वही रोहिट शेट्टी की फिल्म ‘सूर्यवंशी’ पिछले साल 5 नवंबर को रिलीज की गई थी. इसमें अक्षय कुमार, अजय देवगन, रणवीर सिंह और कैटरीना कैफ विभिन्न भूमिकाओं में हैं। कॉप यूनिवर्स फ्रेंचाइजी की इस फिल्म पर इस्लामोफोबिया और लव जिहाद का आरोप लगाय था। फिल्म की कहानी मुंबई में हुए आतंकी वारदातों और पाकिस्तान की हरकतों पर आधारित है। फिल्म में दिखाया जाता है कि पाकिस्तान से ट्रेंड आतंकियों को स्लीपर सेल बनाकर हिंदुस्तान भेजा जाता है। एक आतंकी गोवा में हिंदू बनकर एक लड़की को अपने प्यार में फंसाकर शादी कर लेता है। उसके साथ पूजा-पाठ करता है, लेकिन अकेले में जाकर नमाज पढ़ता है। एक दिन उसका पाकिस्तानी हैंडलर गोवा आकर उसके गोदाम में ब्लास्ट की प्लानिंग कर रहा होता है. इसी बीच हिंदू बने आतंकी की पत्नी आ जाती है। राज न खुल जाए, इसलिए आतंकी उसकी जान ले लेता है। इसी कहानी के आधार पर लव जिहाद की बात कही जा रही है। रोहित शेट्टी की इस फिल्म में मुस्लिम आतंकवाद और लव जिहाद जैसे मुद्दों की गंभीरता पर प्रकाश डाला गया है। इसे फिल्म का मुख्य हिस्सा बनाया गया है।

फिल्मों में प्यार की विभिन्न तरह की काल्पनिक कहानियों ने जो सामाजिक व्यवस्था का जो दोहन किया है। उसके लिए कितना समय लगेगा सच्चाई से पर्दा हटाने में यह कहा नही जा सकता है। हालाकी ऐसे फिल्मों का लोगो ने बहिस्कार भी शुरू कर दिया है। विडंबना यही है की 80% हिंदू बहूल राष्ट्र में सबकुछ हिंदू के विपरित होता है, चाहे देवी देवताओं का अपमान, हिंदू रीति रिवाजों का मजाक, वो किसी दूसरे धर्म के लोगो और कलाकारों द्वारा, आखिर कुरीतिया और प्रथा किस धर्म में नही है फिर हिंदू हमेशा सॉफ्ट टारगेट क्यों बनता है? किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना कानूनन अपराध है तो इसपर सख्ती क्यों नही बरती जाती? ये मौजूदा सरकारों की कमी कहे तो गलत नही होगा।

डिजिटल माध्यम अकेलापन दूर करने का माध्यम बनते जा रहा है जहां परिवार में ही सारे सदस्य एक दूसरे को समय नही दे पा रहे है। लोग अकेलापन दूर करने के लिए बहुत सारी गलत साइट और डेटिग एप्स का सहारा लेने लगे है। परिणाम ये हुआ है मन और तन दोनो बीमार होने लगे है जो शरीर और मन समाज को स्वास्थ्य बनने के लिए जरूरी है अगर वही बीमार हो जायेंगे तो भिविष्य का परिणाम चिंताजनक ही है।

इस तरह की स्थिति को रोकने के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार फायदेमंद साबित हो सकता है।

1. किसी भी तरह की घटना को तुरंत संज्ञान में लेते हुए जरूरी कानूनी कार्यवाही और सजा दी जाय।

2. मां बाप अपने बच्चो के रहन, सहन, आचरण, अध्यात्म के साथ संस्कार की भी शिक्षा जरूर दे। जिससे जीवन के मूल्यों तथा सामाजिक व्यवस्था के बारे में भी जानने – समझने का मौका मिले।

3. अपने बच्चो (लड़का और लड़की) को बचपन से ही हर क्रिया कलापों पर गौर करे और जरूरत पड़ने पर सिखाए। कहा आ–जा रहे है, हो सके तो ये भी जानकारी रखे। ताकि उनको लगे की मैं कुछ भी बुरा करने के लिए मैं स्वतंत्र नहीं हूं। बचपन से जवानी के 20–22 वर्ष तक इन सब चीजों पर ध्यान देने से एक आदत बच्चो में बनती है जो संस्कार, जीवन मूल्य, एक दूसरे का आदर, अपनी संस्कृति के प्रति सजग और शारीरिक रूप से स्वास्थ्य बनने में सहायक होती है।

4. हर मां बाप किशोरा अवस्था में पहुंचे अपने बच्चो को बिना संकोच सब जानकारी दे और स्कूलों में भी इसके लिए एक अलग पीरियड पढ़ाया जाए।

5. बच्चो को ये भरोसा दिलाया जाय की उसके माता –पिता उसके लिए सबसे अच्छी जीवन साथी मिलने में सहयोग करेंगे। जिसके लिए छणिक आकर्षण का शिकार ना बने। जो भविष्य के लिए घातक भी बन सकता है। और सोशल मीडिया के और डिजिटल माध्यम का दुरुपयोग से बचे।

भारत व्यापक परिवर्तन से गुजर रहा है जहां फायदा और नुकसान दोनो बढ़ रहा है ऐसे में हर गवर्निग बॉडी चाहे मां बाप हो या फिर हर वो संस्थान जहा से लोग जुड़े हो जागरूक बने और किसी भी छोटी से छोटी गलती को रोकने का प्रयास करे और कानूनी प्रक्रिया को जटिल ना बना कर गुनहगारो पर सख्त से सख्त करवाही की जाय। ताकि इस तरह के कुकृत्य करने से पहले 100 बार सोचे।

स्वस्थ समाज बनाने के लिए एक दूसरे का आदर, संस्कृति और संस्कार के प्रति झुकाव, इस तरह बढ़ती गंदी मानसिकता से उबरने में सहायक सिद्ध होंगे।

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