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राज शिवालय थियेटर में सैकड़ों युवा लड़कियों के लिए ‘द कन्वर्जन’ फिल्म का फ्री शो

गुजरात। देश के लाखों करोड़ों लड़कियों को जागृत करने के उद्देश्य से बनी फिल्म ‘द कन्वर्जन’ को मुम्बई, दिल्ली जैसे महानगर में सिनेमाहॉल नहीं मिल पायी या यूं कहें कि यह संदेशपरक फिल्म षड्यंत्र का शिकार हो गई। जबरदस्त प्रचार प्रसार होने के बावजूद इसे रिलीज नहीं होने दिया जा रहा है। निर्माताओं ने पैनोरमा डिस्ट्रीब्यूटर पर विश्वास किया लेकिन किसी सोची समझी साजिश के कारण शो नहीं हो पाया। लेकिन वहीं कुछ सिनेमाहॉल मालिक अपनी धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए आगे कदम बढ़ाते हुए फिल्म को लोगों तक निःशुल्क पहुंचाने का जिम्मा उठा लिए हैं।
गुजरात राज्य के आनंद में राज शिवालय सिनेमाहॉल के मालिक हरीश भाई ने सैकड़ों लड़कियों के लिए इस फ़िल्म की फ्री स्क्रीनिंग रखी।
तो दूसरी तरफ मंगलौर (कर्नाटक) में भारत सिनेमा में पिछले 15 दिन से रोज एक शो फ्री कर दिया गया है।
फिल्म के निर्देशक विनोद तिवारी का कहना है कि राष्ट्रहित में हर व्यक्ति को आगे आकर बेटियों को लव जिहाद के बारे में जागरूक करना चाहिए।
गौरतलब हो कि सनातनी बेटियों को एक विशेष वर्ग द्वारा भ्रमित कर धर्मांतरण किया जा रहा है। उनके मनोभावों से खेला जाता है और जब उनका मकसद पूर्ण हो जाता है तो उन बेटियों दर्दनाक सज़ा मिलती है या फिर उनका त्याग कर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है। हमेशा समाचार पत्र और मीडिया में ऐसी घटना का जिक्र होता है किंतु अपराधी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती। उल्टे लड़कियों को दोषी करार दिया जाता है। आखिर वास्तव में कसूरवार कौन है? इस धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म की आड़ में ही अनैतिक और आपराधिक कार्य एक सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है। इस पर पहल करने वाला भी कोई नहीं। अपनी बेटियों को ऐसे ही षड्यंत्रकारी शैतानों से सजग करने के लिए, सनातनियों की आंखें खोलने के लिए फिल्म निर्देशक विनोद तिवारी ने साहसिक कार्य किया है। उन्होंने अपने फ़िल्म के माध्यम से सनातनियों की चेतना जगाने का प्रयास किया है और सत्यता दिखाया है।आखिर इन धर्मांतरण का मकसद क्या है? कौन से वर्ग हैं जो आस्तीन में छुपे साँप बने है। निर्देशक विनोद तिवारी ने अपनी फिल्म ‘द कन्वर्जन’ के माध्यम से सच के पर्दे खोल दिये हैं। यह फ़िल्म उन सभी लड़कियों के लिए है जिनकी आंखों में प्रेम का पर्दा डाल गहरे कुँए में फेंक दिया जाता है। यह वह राह है जिस पर आगे बढ़ कर लौटना नामुमकिन होता है। हिन्दू लड़कियों को अपने मोहपाश में फंसा कर उनका धर्मांतरण करने की सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्म है ‘द कन्वर्जन’।
समस्त भारतीयों को यह फ़िल्म देखनी जरूरी है, खासकर महिला वर्ग को ताकि कल उनके साथ, उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ ना हो।
नोस्ट्रम इंटरटेनमेंट हब के बैनर तले निर्मित ‘द कन्वर्जन’ के निर्माता राज पटेल, विपुल पटेल और राज नोस्ट्रम तथा निर्देशक विनोद तिवारी हैं। वंदना तिवारी लिखित इस फिल्म के संगीतकार अनामिक चौहान हैं।
फिल्म में विंध्या तिवारी, प्रतीक शुक्ला, रवि भाटिया और मनोज जोशी ने अभिनय किया है।

– गायत्री साहू

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