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निर्माता निर्देशक अयान मुखर्जी की सालों की मेहनत कहाँ तक रंग लायी! जानने के लिए फिल्म ‘ब्रम्हास्त्र -पार्ट वन शिवा’ की समीक्षा पढ़ें

ब्रह्मास्त्र – तीन स्टार

कलाकार – रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, नागार्जुन, मौनी रॉय व अन्य
लेखक-निर्देशक – अयान मुखर्जी
संगीतकार – प्रीतम,
निर्माता – करण जौहर, अपूर्वा मेहता, रणबीर कपूर, अयान मुखर्जी, अपूर्व मेहता, नमित मल्होत्रा।
बैनर – स्टार स्टूडियो, धर्मा प्रोडक्शन

काफी समय से चर्चा में रहने वाली फिल्म ‘ब्रम्हास्त्र’ रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म का निर्देशन और लेखन अयान मुखर्जी ने किया है। यह 2डी और 3डी में 400 करोड़ से भी अधिक लागत में बनी फिल्म है। हाल के समय में केवल दक्षिण भारतीय फिल्में ही रुपहले पर्दे पर कामयाब रही है। बॉलीवुड फिल्मों में केवल ‘भूलभुलैया 2’ और ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने अच्छी कमाई की। वहीं ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने सबसे ज्यादा कमाई कर कामयाबी की नई मिशाल कायम की।
अयान मुखर्जी की फिल्म ब्रम्हास्त्र की बात करें तो इसमें हिन्दू धर्म के धार्मिक ग्रंथों में वर्णित अस्त्रों का वर्णन है। जिसमें सबसे बड़ा अस्त्र ब्रम्हास्त्र है। वैसे देखा जाए तो ब्रम्हास्त्र के साथ जिन अस्त्रों को दिखाया गया है वे काल्पनिक अस्त्र हैं जिनका वर्णन नहीं मिलता। इस फिल्म में ब्रम्हास्त्र और अन्य अस्त्रों की रक्षा करने वाले एक दुनिया से छुपे हुए समुदाय ब्रम्हांश भी हैं।
फिल्म की कहानी एक ऐसे लड़के शिवा (रणबीर कपूर) की है जो अनाथ है और वह डीजे है। वह अनाथालय के बच्चों की खुशी में अपने जीवन का आनंद प्राप्त करता है। दशहरा उत्सव में उसे एक बंगाली अमीर परिवार की ईशा (आलिया भट्ट) नाम की लड़की दिखती है और उसे ईशा से पहली नज़र में प्यार हो जाता है। फिर कुछ दिनों बाद वह ईशा से फिर मिलता है। ईशा भी उससे प्रभावित हो कर उससे दोस्ती कर उसके साथ पार्टी में जाती है, जहाँ उसे पता चलता है कि वह अनाथ है और अनाथालय के बच्चों की बर्थडे पार्टी कर उन्हें खुशियाँ बांटता है। ईशा को शिवा अच्छा लगने लगता है तभी शिवा को दौरे पड़ने लगते हैं और वह ईशा को वहीं छोड़ कर दूर चला जाता है। शिवा को दिखाई देता है कि एक साइंटिस्ट को तीन लोग पकड़ कर मरना चाहते हैं। साइंटिस्ट मोहन भार्गव (शाहरुख खान) के पास वानर अस्त्र है और साथ ही ब्रम्हास्त्र के तीन टुकड़ो में से एक हिस्सा। इस हिस्से को पाने के लिए जुगनू (मौनी रॉय) और उसके दो साथी जोर और रफ्तार प्रयास करते हैं। साइंटिस्ट को अपने वश में कर वे अन्य हिस्सों की जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें ज्ञात होता है कि ब्रम्हास्त्र का दूसरा हिस्सा आर्टिस्ट अमिश शेट्टी (नागार्जुन) के पास है जो इस समय बनारस में है और तीसरे हिस्से की जानकारी में उन्हें ज्यादा कुछ पता चले उससे पहले मोहन भार्गव उनके वशीकरण से बाहर आ जाता है। उन्हें ज्यादा जानकारी प्राप्त ना हो इस लिए वह स्वयं को बिल्डिंग की छत से गिरा कर आत्महत्या कर लेता है। यह सारी घटना शिवा को दिखाई देती है। अगले दिन शिवा होश में आता है और अनाथालय के बच्चों की मदद से ईशा के बारे में जानकारी प्राप्त करता है।वह ईशा से मिलने जाता है जहाँ उसे पता लगता है कि जिस साइंटिस्ट मोहन भार्गव को बीती रात देखा था वह उसकी कल्पना नहीं हकीकत थी। यह बात वह ईशा को बताता है। ईशा उसका विश्वास करती है और उसके साथ बनारस आती है। बनारस आने के बाद अमिश भार्गव को दोनों बचाने की कोशिश करते हैं लेकिन कामयाब नहीं होते हैं लेकिन यहीं से उन्हें गुरुजी (अमिताभ बच्चन) के पास जाने का मौका मिलता है और नए रहस्यों से उनकी मुलाकात होती है।
जो फिल्म को रोचक और रोमांचक बनाता है।
फिल्म के फिल्मांकन और दृश्यों की बात करते हैं जो बेहद शानदार और भव्य है हर दृश्य को निर्देशक ने बड़ी खूबसूरती के साथ चित्रण किया है जिसे देख लगता है हम किसी फैंटेसी दुनिया में है। फिल्म में वीएफएक्स का भरपूर इस्तेमाल किया गया है थ्रीडी इफेक्ट भी अच्छा है जिसे और बेहतर बनाया जा सकता था। अभिनय की बात करें तो कैमियो रोल में शाहरुख खान स्मार्ट तो लगे लेकिन उनके डायलॉग अच्छे नहीं है भला एक साइंटिस्ट भी क्या मजाकिया हो सकता है? नागार्जुन और डिम्पल कपाड़िया का अभिनय प्रभावहीन है इन दिग्गजों की प्रतिभा को निर्देशक इस्तेमाल नहीं कर पाए या हो सकता इन कलाकारों ने ज्यादा मेहनत ही नहीं की। मौनी रॉय फिल्म की नकारात्मक पात्र है जो दिखने में प्रभावी है। महानायक अमिताभ बच्चन ने अपना काम बखूबी निभाया है । आलिया सिर्फ खूबसूरत ही दिखीं है उनका अभिनय साधारण स्तर का है। अब बात करें फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता रणवीर कपूर की तो वे कई दृश्यों में खोए हुए दिखे। कहीं कहीं उनके चेहरे का भाव खुशी और गम में एक ही जैसा दिखता है। निर्देशक ने कलाकारों की कौशलता का सही इस्तेमाल नहीं किया बल्कि उनका ध्यान केवल भव्यता पर ज्यादा था।
फिल्म में लड़ाई के दृश्यों में वीएफएक्स का इस्तेमाल बहुत अच्छा है। जैसे मॉल में हम फाइव डी सेवन डी एक्सपीरियंस देखने जाते हैं वैसा ही मनोरंजक अनुभव इस थ्रीडी फिल्म में देखने को मिलेगी। फिल्म का वीएफएक्स हॉलीवुड को टक्कर देने की कोशिश कर रहा है लेकिन बराबरी नहीं कर सकता।
फिल्म की कहानी में हल्का नयापन है फिल्म में सस्पेन्स भी है लेकिन वो एक समरसता में नहीं है। कुछ सस्पेन्स फिल्म की अगली कड़ी में ज्ञात होगा पर यह निश्चित है कि अगली कहानी शिवा के माता पिता के प्रेम और जंग की कहानी होगी। जैसे बाहुबली कंक्लूजन में है पर ये थोड़ा अलग होगी इसलिए तो फिल्म की कास्ट राजामौली से आशीर्वाद लेने गयी थी उनके नक्शे कदम पर जो चलना है। फिल्म का गीत ‘केसरिया तेरा’ और ‘नमो’ गीत ही सुनने में ठीक ठाक है।
यदि पूरे फिल्म की बात की जाए तो फिल्म को थ्रीडी में रुपहले पर्दे पर देखना रोमांचक अनुभव रहेगा क्योंकि फिल्म की भव्यता और वीएफएक्स ही है जो दर्शकों का मन मोहकर उन्हें सिनेमाघरों तक लाएगा।
निर्देशक अयान मुखर्जी फिल्म में और रोमांच भर सकते थे।
फिल्म को तीन स्टार मिलते हैं क्योंकि काफी लंबे समय बाद सिनेमा में कुछ नई कहानी, फैंटसी, भव्यता और बेहतरीन वीएफएक्स का प्रयोग किया गया है।

– गायत्री साहू

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