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मातृ नव दुर्गा

उन्नमुक्त गगन में है विचरित
कण कण में है समाहित
सम्मुख ना होती ये अवतरित
हृदय अंतरण में प्रफुल्लित
आदि है ना अंत इसका
कुमुदिनी है वन पुष्पा

वैतरणी तारणी कल्याणी
शैल पुत्री मंगलदायिनी
तपस्विनी ब्रम्हचारिणी
सत्यवादिनी भयभव हारिणी
दयानिधि माँ अम्बिका
महिसासुरमर्दनी नाम उसका

शुम्भ निशुम्भ की काल स्वरूपा
चंद्रघण्टेति रौद्रस्वरूपा
दयानिधि जग की माता
स्नेह प्रदायनी स्कंदमाता
धूम्रलोचना माँ कात्यानी
पापनाशिनी गंगा अनुजा

तमसनाशिनी अग्निरूपा
कालरात्रि जवालारूपा
रक्तबीज भक्षणी कालिका
मधुकैटभ मर्दिनी महागौरीसा
नवरात्रि नवज्योति नवरूपा
कोटि कोटि नमन मातृ दुर्गा

-गायत्री साहू

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