ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ साहित्य

मार्कण्डेय त्रिपाठी की पंक्ति “रामचरितमानस की महिमा”

रामचरितमानस की महिमा

रामचरितमानस अति पावन ,
इसकी महिमा अमिट, अपार ।
जन, जन का यह कंठहार है ,
जिसमें वर्णित जीवन सार ।।

संस्कृति की झांकी मानस है,
मर्यादाओं की तस्वीर ।
तुलसी की यह अमर निशानी ,
हर लेती पल में भव पीर ।।

सीताराम चरित मन भावन ,
मर्यादाओं का श्रृंगार ।
व्यथित हृदय आनंदित करता,
इसका मधुमय रस भंडार ।।

सफल समन्वय है वादों का,
है समस्त दर्शन का मेल ।
काव्य विधा अति हृदयावर्जक,
खिलती रसिक मनस् की बेल ।।

अवधी की है छटा निराली ,
छंद, रसों का है परिपाक ।
अलंकार सारे इसमें हैं ,
तुलसी हृदय रहा निष्पाप ।।

ईश्वरीय लीला अति प्यारी ,
अद्भुत रामचरित का गान ।
दिव्य दिवाकर बन तुलसी ने,
जग का किया बहुत कल्याण ।।

मानस पाठ करो जितना ही,
उतना ही बढ़ता शुचि ज्ञान ।
जीवन दृष्टि बदल जाती है ,
मिट जाता सारा अभिमान ।।

राम और रावण ,सुन प्यारे ,
मनस् तत्व के युगल भाव हैं ।
द्वंद्व इन्हीं का है जीवन में ,
ये जीवन के पृथक् चाव हैं ।।

आदर्शों की पावन झांकी ,
मानस की पूंजी है भाई ।
कैसा जीवन हम अपनाएं ,
देता इसमें सहज दिखाई ।।

होता पाठ आज़ घर, घर में,
गूंज रही मानस् चौपाई ।
अमा निशा को दूर भगाती,
तुलसी बाबा की कविताई ।।

मार्कण्डेय त्रिपाठी

 

 

संबंधित पोस्ट

गड्ढा मुक्त सड़क के लिए नागरिक विकास पार्टी ने चेताया सड़क ना बनने की सूरत में होगा घेराव।

Hindustanprahari

बड़का मांझा पंचायत के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी।

Hindustanprahari

हुमा कुरैशी की एक ही महीने में 3 फिल्में होगी रिलीज

Hindustanprahari

‘ससुराल गेंदा फूल सीजन 2’ में नज़र आएगी अभिनेत्री शिल्पा गांधी

Hindustanprahari

शेर नगर में इमारत के खस्ताहाल बाउंड्री वॉल का होगा दुरुस्तीकरण

Hindustanprahari

एक्शन के साथ अंग प्रदर्शन का तड़का : ‘लड़की – इंटर द गर्ल ड्रैगन’ 

Hindustanprahari