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साहित्य

भारत की खुशहाली

शुद्ध हवा का झोंका लाओ।
वायु प्रदूषण शीघ्र भगाओ।।

चारों तरफ अंधेरा छाया।
दौड़ो आज रोशनी लाओ।।

लोकतंत्र विकलांग पड़ा है।
उसको कोई दवा पिलाओ ।।

दिशा हीनता नाच रही है।
उस पर शीघ्र लगाम लगाओ ।।

खोपड़ियाँ सब उलट गईं हैं।
उनको सच्ची राह दिखाओ ।।

बेमतलब के इस बकबक से।
यथा शीघ्र तुम बाहर आओ ।।

खुली हवा में खुलकर बोलो।
आपस में कुछ प्रेम बढ़ाओ ।।

देशप्रेम पर बात चलाकर।
आपस में मानवता गाओ।।

सारे जाति धर्म को छोड़ो।
केवल मानव धर्म चलाओ।।

हर कोई इंसान यहाँ है।
बस इतना समझो समझाओ ।।

नैतिकता को मंत्र मानकर ।
बढ़िया सुंदर राष्ट्र बनाओ ।।

गैर जरूरी खर्च रोककर ।
मेहनत से उत्पादन लाओ ।।

फैशन की दुनिया से हटकर ।
जीवन का आधार बनाओ।।

करो कल्पना खुशहाली की।
मन में अति उत्साह जगाओ ।।

सारा व्यर्थ बवंडर छोड़ो।
खुद को ही तुम खुदा बनाओ।।

अधेरों से दूर हटो तुम।
अपने भीतर दीप जलाओ।

भारत की टूटी नैया के।
खुद को खेवनहार बनाओ।।

मातृभूमि तुमसे कहती है।
कर्ज चुकाकर फर्ज निभाओ ।।

अपने सारे सत्कर्मों से।
भारत में खुशहाली लाओ।।

अन्वेषी

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