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हर दिन लगभग 300 लोग भारतीय नागरिकता छोड़ रहे हैं,

हर दिन लगभग 300 लोग भारतीय नागरिकता छोड़ रहे हैं, यह आंकड़ा पिछले 5 वर्षों में 6 लाख से अधिक तक पहुंच गया है
पा पालघर जिला संवाददाताााा दिव्या बागी प्राप्त सूत्रों के जानकारी के अनुसार
केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को बताया कि पिछले पांच सालों में 6 लाख से ज्यादा भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है.  जबकि इस दौरान 10,645 लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है।  सबसे ज्यादा आवेदन पाकिस्तान में रहने वालों से मिले हैं।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दी जानकारी

विदेशों में रहने वाले 1,33,83,718 भारतीय नागरिक

10,645 ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया


(पालघर जिला संवाददाता दिव्या बागी)
नई दिल्ली: पिछले पांच सालों में 6 लाख से ज्यादा भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है.  यानी हर दिन करीब 300 लोग अपनी नागरिकता छोड़ चुके हैं।  केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को यह चौंकाने वाली जानकारी दी है.  उन्होंने मंगलवार को सदन को बताया कि पिछले 5 सालों में 6 लाख से ज्यादा लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है.  उन्होंने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में कुल 1,33,83,718 भारतीय नागरिक विदेश में रह रहे हैं.

लिखित प्रश्न के उत्तर में दी गई जानकारी

एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 2017 में 1,33,049 भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी थी।  जबकि 2018 में 1,34,561 भारतीय, 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,248 और इस साल 30 सितंबर, 2021 तक 1,11,287 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है।  इस बीच देश में एनआरसी की स्थिति को लेकर टीएमसी सांसद माला रॉय के एक सवाल के जवाब में नित्यानंद राय ने कहा कि अभी तक केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने का फैसला नहीं किया है

पाकिस्तान से सबसे ज्यादा आवेदन

गृह राज्य मंत्री ने लोकसभा को बताया कि इसी तरह पिछले पांच वर्षों में 10,645 लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है।  इनमें से 4177 मुहैया करा दिए गए हैं।  नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों में अमेरिका से 227, पाकिस्तान से 7782, अफगानिस्तान से 795 और बांग्लादेश से 184 हैं।  राय ने कहा कि साल 2016 में 1106 लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई थी.  जबकि 2017 में 817, 2018 में 628, 2019 में 987 और 2020 में 639 को देश की नागरिकता दी गई है।

देश का कानून क्या कहता है?

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, भारत के नागरिकों को दो देशों की नागरिकता रखने की अनुमति नहीं है।  अगर किसी व्यक्ति के पास भारतीय पासपोर्ट है और उसने दूसरे देश की नागरिकता भी हासिल कर ली है, तो उस स्थिति में उसे तुरंत भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करना होगा।  दूसरे शब्दों में, यदि किसी व्यक्ति ने विदेश में रहते हुए भारत की नागरिकता का त्याग किया है और वह भारत लौटकर यहां का नागरिक बनना चाहता है, तो उस पर वही नियम लागू होंगे जो किसी नए देश में नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए लागू होते हैं।  इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति विदेश में रहकर किसी देश का नागरिक बन जाता है तो उसके पास भारत की नागरिकता त्यागने के अलावा कोई चारा नहीं होता।

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