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एकनाथ शिंदे ने प्रकाश आंबेडकर से की मुलाकात, नए राजनीतिक समीकरण के लग रहे कयास

मुंबई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) बुधवार (१६/११/२२) को वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) से मिलने उनके घर पहुंचे।

इस मुलाकात के बाद नए राजनीतिक समीकरणों के कयास लगने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से चर्चा चल रही थी कि बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी का शिवसेना उद्धव बाला साहब ठाकरे यानी शिवसेना के उद्धव गुट के साथ गठबंधन होने जा रहा है।

उद्धव ठाकरे के साथ मंच साझा करने वाले थे प्रकाश आंबेडकर

प्रकाश आंबेडकर उद्धव ठाकरे के साथ एक सभा में मंच भी साझा करने वाले थे। इस चर्चा में इसलिए भी दम नजर आ रहा था, क्योंकि पिछले कुछ समय से प्रकाश आंबेडकर की पार्टी राजनीतिक हाशिए पर पहुंच चुकी नजर आने लगी है। जबकि महाराष्ट्र की दलित राजनीति में उनके प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी (आठवले गुट) के अध्यक्ष रामदास आठवले भाजपा का दामन थाम केंद्रीय मंत्री बने हुए हैं। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे प्रकाश आंबेडकर को साथ लेकर शिवशक्ति-भीमशक्ति का नारा बुलंद करने वाले थे।

एकनाथ शिंदे बोले, प्रकाश आंबेडकर से नहीं हुई राजनीतिक चर्चा

इसी बीच, बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अचानक प्रकाश आंबेडकर के घर राजगृह जाकर नए कयासों को जन्म दे दिया, लेकिन प्रकाश आंबेडकर से मिलकर निकलने के बाद शिंदे ने पत्रकारों से कहा कि इस भवन में ही बाबा साहब आंबेडकर रहा करते थे। इसे उन्होंने ही बनवाया था। इसका निर्माण उनकी कल्पना के आधार पर ही किया गया था। उनके द्वारा उपयोग की गईं मेज, कुर्सी जैसी तमाम वस्तुएं आज भी यहां जस की तस रखी हैं। इन वस्तुओं का ऐतिहासिक महत्व है। ये वस्तुएं बाबा साहब आंबेडकर के चरणों का स्पर्श पाकर पवित्र हो चुकी हैं। मैं यहां उन्हीं का दर्शन करने आया था। शिंदे ने कहा कि इसके साथ ही मेरी प्रकाश आंबेडकर से भी मुलाकात हुई। इस मुलाकात का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए। हमारी उनकी कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई है।

कभी शरद पवार के करीबी माने जाते थे रामदास आठवले

महाराष्ट्र में पिछले दो दशक से दलित राजनीति में दो गुट शक्तिशाली रहे हैं। एक रामदास आठवले का, तो दूसरा प्रकाश आंबेडकर का। रामदास आठवले पहले शरद पवार के करीबी माने जाते थे। उन्हें राजनीति में लाकर सुर्खियां दिलाने वाले भी शरद पवार ही थे, लेकिन लंबे समय तक शरद पवार के साथ रहने के बाद आठवले पाला बदल कर पहले शिवसेना के साथ गए। केंद्र की राजनीति में नरेन्द्र मोदी के उभार के बाद वह अब भाजपा के करीब आ चुके हैं।

खुद को राजनीतिक हाशिए पर महसूस कर रहे हैं प्रकाश आंबेडकर

दूसरी ओर, प्रकाश आंबेडकर ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम से गठबंधन किया था, लेकिन इसका लाभ सिर्फ एआइएमआइएम को हुआ और वह औरंगाबाद की लोकसभा सीट जीत गई। प्रकाश आंबेडकर को एक भी सीट नहीं हासिल हुई। तब से वह खुद को राजनीतिक हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। अभी यह समझना भी मुश्किल है कि वह भविष्य में किसके साथ जाएंगे।

 

रिपोर्ट : प्रतीक कै. गुप्ता (उपसंपादक)

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