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जीआई से पीड़ित 17 वर्षीय एक लड़के का वॉकहार्ट अस्पताल में सफलतापूर्वक इलाज

मुंबई। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रक्तस्राव (जीआई) यह गंभीर यकृत विकार से पीड़ित 17 वर्षीय लड़के का वॉकहार्ट हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक इलाज हुआ है। मिरारोड के वॉकहार्ट हॉस्पिटल के कंसल्टेंट जीआई एचपीबी और जीआई ऑन्कोसर्जन डॉ इमरान शेख के नेतृत्व में एक टीम ने इस मरीज का इलाज किया है। अब मरीज की सेहत में सुधार हो रहा है।
नालासोपारा में रहने वाला लड़का कॉलेज का छात्र है। उसे उल्टी और खांसी में दर्द और खून के साथ बार-बार पेशाब की परेशानी हो रही थी। उन्होंने कोई घरेलू उपाय नहीं आजमाया। उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से परामर्श किया लेकिन सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसलिए परिवारवालों ने उन्हे वोकहार्ट अस्पताल दाखिल किया। यहाँ डाँक्टरो के किए इलाज के कारण मरीज को नई मिली हैं।
मिरारोड स्थित वॉकहार्ट अस्पताल के कंसल्टेंट जीआई एचपीबी और जीआई ऑन्कोसर्जन डॉ इमरान शेख ने कहा कि मरीज को यकृत से संबंधित बिमारी थी। अस्पताल में मरीज को लाया गया था तब उसकी सेहत नाजूक थी। उन्हें तुरंत पीआईसीयू में भर्ती कराया गया और उन्हें खून चढ़ाया गया। उनका प्लेटलेट काउंट और हीमोग्लोबिन कम था। वैद्यकीय जाचं में उन्हे उच्च रक्तचाप के साथ एक्स्ट्राहेपेटिक पोर्टल शिरा अवरोध (ईएचपीवीओ) पाया गया। यह पोर्टल शिरा का एक संवहनी विकार है। इस विकार में मुख्य शिरा में रुकावट होती है। रुकावट के कारण आंतों के जहाजों पर पीठ का दबाव बढ़ जाता है जिससे उल्टी या मल में रक्तस्राव होता है। यह ऊपरी जीआई रक्तस्राव का एक सामान्य कारण है। यह दूसरा सबसे आम कारण है। यह बिमारी आमतौर पर युवा में होती है। रोग 0.05% – 0.5% सामान्य है। ऐसे अधिकांश मामलों का प्रबंधन एंडोस्कोपी द्वारा किया जाता है और बहुत ही चुनिंदा मरीजों को जटिल सर्जरी की आवश्यकता होती है। इस मरीज पर गैस्ट्रोओसोफेगल डिवास्कुलराइजेशन के साथ स्प्लेनेक्टोमी नामक सर्जरी की गई। यह प्रक्रिया 6 घंटे तक चली और उन्हें एक सप्ताह के भीतर छुट्टी दे दी गई। सही समय पर उनका इलाज नहीं करने से सांस लेने में तकलीफ, दिल का दौरा या यहां तक ​​कि जटिलताएं भी हो सकती थी।
सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ ललित वर्मा ने मरीज पर एंडोस्कोपिक वैरिकाज़ लिगेशन की एक जीवन-रक्षक प्रक्रिया सफलतापूर्वक की है।
मरीज ने कहा कि ईएचपीवीओ और जीआई रक्तस्राव के निदान के बाद मैं डर गया था। लेकिन मैं भाग्यशाली था कि मुझे वॉकहार्ट अस्पताल में समय पर इलाज मिल गया। मैं ठीक हो गया हूं और जल्द ही कॉलेज जाना फिर से शुरू करूंगा।

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