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कसम

 

शस्य श्यामला माँ भारती
तेरी कसम हम खाते हैं।
तेरी रक्षा में जान लुटा
हम कर्तव्य अपना निभाते हैं।।

ऊँचा तुंग हिमालय
श्वेत किरीट है धारे ।
भारत के भाल पर सूर्य
किरण अपना शौर्य हारे।।

माँ तेरे पावन चरणों में
हिंद महासागर मचले ।
केसर की क्यारी उत्तर
दिशा में रूप हर पल बदले।।

सत्य सनातन काल से
विश्व बंधुत्व हमारा है नारा।
कसम हम खाते हैं
वसुधैव कुटुंबकम है हमारा।।

पश्चिम में अरब सागर
पूर्व में खाडी है न्यारा।
विविध धर्म जाति में,
भाई चारा का नाता प्यारा।।

तेरी गोदी में जन्म लिया
तन मन तुम पर वारा।
कसम तुम्हारी है माँ
भारती प्राण समर्पण हमारा।।

नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)

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