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हल्दी के चमत्कारिक गुण – स्वस्थ तन, मन और भोजन

हर भारतीय घरों की रसोई में आयुर्वेदिक औषधियाँ रहती है बस हमें उसके गुणों का भान नहीं होता। ऐसी ही एक चमत्कारिक औषधि है हल्दी,
हल्दी की इतनी चमत्कारिक गुण हैं की आप सोच भी नहीं सकते। पीली दिखने वाली ये छोटी सी दावा त्वचा, खून, सूजन, रक्तवाहिनियों और चोट आदि में रामबाण दावा है।

मसालों में भी हल्दी (Haldi) का एक अलग ही महत्व है। यही कारण है कि आपको हर घर की रसोई में हल्दी ज़रूर मिलेगी। हल्दी खाने का स्वाद और रंग रूप तो बढ़ाती ही है साथ ही यह कई तरह के रोगों से भी रक्षा करती है। प्राचीन काल से ही हल्दी को जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। आयुर्वेद में हल्दी के फायदे के बारे में विस्तृत उल्लेख है।

भारतीय संस्कृति में विवाह के अवसर पर वर और वधु को विवाह के पूर्व हल्दी का लेप लगाया जाता है यह रिवाज सदियों से है और आज भी लोग इस रिवाज को मानते हैं। इसके पीछे भी एक गुढ़ रहस्य है। प्राचीन समय में खेती बड़ी बारिश के मौसम में की जाती थी और ठंड में कटाई और संग्रहण का काम होता था। अधिकांश विवाह ग्रीष्म समय में हुआ करता था क्योंकि उस समय खेती का काम बन्द रहता है। वर वधु को हल्दी लगाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण यह है की हल्दी त्वचा के रोगों को दूर कर त्वचा को निखरता है। साथ ही युवावस्था में हो रहे हॉर्मोन बदलाव को

कंट्रोल काटता है, शारीरिक तामस को शांत रखता है। यही वजह है की आज भी हल्दी की रस्म लोग खुश होके मानते हैं।
आज विवाह में वर कन्या को मंगल सूत्र पहनकर और सिंदूर लगाकर अपना जीवनसाथी स्वीकार करता है। लेकिन पहले हल्दी की एक गांठ को मंगलसूत्र की जगह प्रयोग कर जीवनभर का पवित्र बंधन स्वीकार करते थे। आज भी दक्षिण भारत में यह प्रथा चल रही है। यहाँ तक की विवाह का निमंत्रण देने हेतु हल्दी की गांठ का प्रयोग किया जाता है। प्रत्येक घर में एक हल्दी का टुकड़ा देकर निमंत्रण दिया जाता था। आज भी गाँवों में बुलावे के लिए या जिसे निमंत्रण देना है उनके घर के सामने हल्दी पानी डाल कर न्यौता दिया जाता है। प्राचीन नियमों में कई परिवर्तन जरूर आये हैं पर हर हिन्दू घर में निमंत्रण कार्ड पर हल्दी का लेप आज भी लगा कर निमंत्रण पत्रिका अपने मेहमानों के घर भेजा जाता है। हल्दी के कई और पौराणिक महत्व भी है। हल्दी को पवित्र मानकर भगवान को भी अर्पण किया जाता है और हल्दी का टिका माथे पर लगाया जाता है जिसे शुभ माना जाता है।

हल्दी एक जड़ी-बूटी है। इसका इस्तेमाल मसालों के रुप में प्रमुखता से किया जाता है। हिंदू धर्म में पूजा में या कोई भी शुभ काम करते समय हल्दी का उपयोग किया जाता है। खाने के अलावा कई तरह की बीमारियों से बचाव में भी हल्दी का उपयोग होता है। इस समय पूरी दुनिया में हल्दी के गुणों पर रिसर्च चल रहे हैं और कई रिसर्च आयुर्वेद में बताए गुणों कि पुष्टि करते हैं।

हल्दी की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चार प्रजातियों का प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

Curcuma longa : हल्दी की इस प्रजाति का उपयोग मुख्य रुप से मसालों और औषधियों के रूप में किया जाता है। इसके पौधे 60-90 सेमी तक ऊँचें होते हैं। इस हल्दी का रंग अंदर से लाल या पीला होता है। यही वह हल्दी है जिसका उपयोग हम अपने घरों में सब्जी बनाने में करते हैं।

Curcuma aromatica:  इसे जंगली हल्दी कहते हैं।

Curcuma amada: इस हल्दी के कन्द और पत्तों में कपूर और आम जैसी महक होती है। इसी वजह से इसे आमाहल्दी (Mango ginger) कहा जाता है।

Curcuma caesia: -इसे काली हल्दी कहते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस हल्दी में चमत्कारिक गुण होते हैं। इस हल्दी का उपयोग ज्योतिष और तंत्र विद्या में ज्यादा होता है।

अन्य भाषाओं में हल्दी के नाम  (Name of Haldi in Different languages) :

हल्दी का वानस्पतिक नाम Curcuma longa Linn. (कुरकुमा लौंगा) Syn-Curcuma domesticaValeton

कुल का नाम Zingiberaceae (जिन्जिबेरेसी) है।

अन्य भाषाओं में इसे निम्न नामों से पुकारा जाता है।

Names of Turmeric in different languages:

Name of Haldi in English : Turmeric (टर्मेरिक्)

Name of Haldi in Sanskrit : हरिद्रा, काञ्चनी, पीता, निशाख्या, वरवर्णिनी, रजनी, रंजनी, कृमिघ्नी, योषित्प्रिया, हट्टविलासिनी, हलदी, गौरी, अनेष्टा, हरती

Name of Haldi in Hindi : हलदी, हर्दी, हल्दी;

Name of Haldi in Urdu : हलदी (Haladi)

Name of Haldi in Asam : हलादी (haladhi);

Name of Haldi in Konkani : हलद (Halad);

Name of Haldi in Kannada : अरसिन (Arsina), अरिसिन (Arisin)

Name of Haldi in Gujrati : हलदा (Halada);

Name of Haldi in Tamil : मंजल (Manjal)

Name of Haldi in Telgu : पसुपु (Pasupu), पाम्पी (Pampi)

Name of Haldi in Bengali : हलुद (Halud), पितरस (Pitras);

Name of Haldi in Punjabi : हलदी (Haldi), हलदर (Haldar);

Name of Haldi in Marathi : हलद (Halade), हलदर (Haldar);

Name of Haldi in Malyalam : मन्जल (Manjal), मन्नाल (Mannal), पच्चामन्नाल ( pacchamannal)

Name of Haldi in English : कॉमन टर्मेरिक (Commonturmeric), इण्डियन सैफरन (Indian saffron),

Name of Haldi in Arabi : उरुकेस्सुफ (Urukessuf), कुरकुम (Kurkum);

Name of Haldi in Persian : जर्द चोब (Zard chob), दारजरदी (Darjardi)

हल्दी हमारे शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाती है जिस वजह से तमाम तरह की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। हल्दी में वात कफ दोषों को कम करने वाले गुण होते हैं और यह शरीर में खून बढ़ाने में मदद करती है। डायबिटीज में हल्दी का सेवन बहुत ही उपयोगी (haldi uses in hindi) माना जाता है।

आइये जानते हैं कि हल्दी के सेवन से किन रोगों में आराम मिलता है और इसका सेवन किस तरह करना चाहिए।

हल्दी की तासीर गर्म होने की वजह से जुकाम में इसका सेवन करना फायदेमंद रहता है। हल्दी के धुंए को रात के समय सूंघने से जुकाम जल्दी ठीक होता है। हल्दी सूंघने के कुछ देर बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए।

सिर की फुंसियों से आराम दिलाती है हल्दी , फेफड़ों में सूजन में हल्दी बहुत चमत्कारिक असर करती है सूजन भरने के साथ साथ क्षतिग्रस्त फेफड़ों को ठीक करने में हल्दी लाभदायक होती है। इसके लिए हल्दी को थोड़े से अदरक के साथ पीस कर चूर्ण बना ले , उसे रोज पानी में उबालकर उस गुनगुने पानी का सेवन प्रतिदिन करने से लाभ मिलता है।

गर्मी के मौसम में सिर में फुंसियां निकलना एक आम समस्या है। सिर में तेज खुजली होती है और खुजलाने पर दर्द और जलन होता है। इस समस्या से आराम पाने के लिए हल्दी और दारूहरिद्रा, भूनिम्ब, त्रिफला, नीम और चन्दन को पीसकर रोजाना सिर पर मालिश करने से शीघ्र लाभ होता है।

आंखों में दर्द होने पर या किसी तरह का संक्रमण होने पर हल्दी (turmeric in Hindi) का प्रयोग करना फायदेमंद रहता है। 1 ग्राम हल्दी को 25 मिली पानी में उबालकर छान लें। छानने के बाद इसे आंखों में बार बार डालने से आंखों के दर्द से आराम मिलता है। कंजक्टीवाइटिस होने पर भी आप इसी घरेलू उपाय की मदद से आराम (haldi ke fayde)पा सकते हैं। हल्दी का गुण आँखों के लिए बहुत ही उपयोगी (haldi uses in hindi) होता है।

कान से गाढ़ा तरल निकलना एक समस्या है जिसे आम भाषा में लोग कान बहना कहते हैं। इससे आराम पाने के लिए हल्दी को पानी में उबालकर, छान लें और उसे कान में डालें।

सरसों का तेल, हल्दी में मिलाकर सुबह-शाम मसूड़ों पर लगाकर अच्छी प्रकार मालिश करने तथा बाद में गर्म पानी से कुल्ले करने पर मसूड़ों  के सब प्रकार के रोग दूर (haldi ke fayde) हो जाते हैं। हल्दी का गुण पायरिया के लिए फायदेमंद होता है।

गले की खराश होने पर अजमोदा, हल्दी, यवक्षार और चित्रक इन सबके 2-5 ग्राम चूर्ण को एक चम्मच शहद के साथ सेवन करने से गले की खराश दूर होती है।

हल्दी (haldi in hindi) को भूनकर चूर्ण बना लें। 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण (Turmeric powder in Hindi) के शहद या घी के साथ मिलाकर खाने से खांसी में आराम मिलता है।

पेट दर्द होने पर भी हल्दी का सेवन करने से दर्द से जल्दी आराम मिलता है। 10 ग्राम हल्दी (haldi in hindi)को 250 ml पानी में उबाल लें। पेट दर्द होने पर इसमें गुड़ मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पियें।

खराब जीवनशैली और खराब खानपान की वजह से अधिकांश लोग कब्ज़ के मरीज हो जाते हैं। कब्ज़ के कारण ही आगे चलकर बवासीर की समस्या होने लगती है। बवासीर से आराम पाने के लिए सेहुंड के दूध में 10 ग्राम हल्दी मिलाकर मस्सों में लगाएं। । इसके अलावा सरसों के तेल में हल्दी चूर्ण (Turmeric powder ) को मिलाकर मस्सों पर लगाने से बवासीर में आराम मिलता है।

पीलिया एक ऐसी समस्या है जिसका सही इलाज ना करवाने पर आगे चलकर यह बहुत गंभीर समस्या में बदल जाती है। छोटे बच्चों में यह समस्या ज्यादा होती है। पीलिया होने पर 6 ग्राम हल्दी चूर्ण को मठ्ठे में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने पर 4-5 दिन में ही पीलिया से आराम मिल जाता है। इसके अलावा 5-10 ग्राम हल्दी चूर्ण में 50 ग्राम दही मिलाकर खाने से भी पीलिया में फायदा होता है।

लौह भस्म, हरड़ और हल्दी इन तीनों को एक बराबर मात्रा में मिलाकर इसकी 375mg मात्रा में घी और शहद मिलाकर सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

2 से 5 ग्राम हल्दी चूर्ण में आंवला रस और शहद मिलाकर सुबह और शाम को खाना, डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा हल्दी, दारुहल्दी, तगर और वायविडंग का क्वाथ बनाकर उसकी 20-40 ml की मात्रा में 5-10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह- शाम सेवन करने से डायबिटीज में फायदा (haldi ke fayde) होता है।

स्तन से जुड़ी समस्याओं में भी हल्दी का उपयोग करना फायदेमंद रहता है।  हल्दी और लोध्र को पानी में घिसकर स्तनों पर लेप करने से स्तन से जुड़े रोगों में लाभ (haldi ke fayde) होता है।

हल्दी चूर्ण (Turmeric powder ) और गुग्गुल चूर्ण को एक बराबर मात्रा में मिलाकर इसकी 2-5 ग्राम मात्रा का सुबह-शाम सेवन करने ल्यूकोरिया में फायदा मिलता है। इसके अलावा 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण को 100 ml दूध में उबालकर उसमें गुड़ मिलाकर खाने से भी ल्यूकोरिया में फायदा पहुँचता है।

हल्दी के प्रयोग से कुष्ठ रोग के प्रभाव को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण में गोमूत्र मिलाकर पिएं। इसके अलावा हरिद्राचूर्ण में बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर गोमूत्र के साथ सेवन करने से दाद और कुष्ठ रोग में फायदा होता है।

अगर आपकी त्वचा पर कहीं दाद खुजली हो गयी है तो हल्दी के इस्तेमाल से आप इन समस्याओं को जल्दी ठीक कर सकते हैं। इसके लिए खुजली (seborrheic dermatitis in hindi) वाली जगह पर हल्दी का लेप या हल्दी के साथ नीम की पत्तियों का लेप लगाएं।

खुजली, दाद के अलावा चर्म रोग में भी हल्दी का प्रयोग करने से फायदा होता है। इसके लिए 2-5 ग्राम हल्दी चूर्ण (Turmeric powder in Hindi) को गोमूत्र में मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करें। इसके अलावा हल्दी के चूर्ण में मक्खन मिलाकर चर्म रोग (seborrheic dermatitis in hindi) वाली जगह पर लगाने से भी फायदा होता है।

शरीर के किसी हिस्से में अगर सूजन हो रही है तो हल्दी के उपयोग से आप सूजन कम कर सकते हैं। इसके लिए हल्दी, पिप्पली, पाठा, छोटी कटेरी, चित्रकमूल, सोंठ, पिप्पली, जीरा और मोथा को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इसे कपड़े से छान कर अलग रख लें। इस चूर्ण का 2-2 ग्राम की मात्रा गुनगुने जल के साथ मिलाकर खाने से सूजन में कमी आती है।

आमतौर पर 1-2 ग्राम हल्दी का रोजाना सेवन करना सेहत के लिए उपयुक्त है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के लिए हल्दी का उपयोग करना चाहते हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार करें

यदि आप डायबिटीज पेशेंट इन 5 चीजों के साथ करें हल्दी का सेवन, ब्लड शुगर लेवल रहेगा कंट्रोल,हल्दी शुगर पेशेंट के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। अगर इसका ठीक तरह से इस्तेमाल किया जाए तो ये ब्लड शुगर लेवल को काबू में कर सकती है।

किचन में मौजूद हल्दी ना केवल खाने में रंगत लाने का काम करती है बल्कि आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। हल्दी फाइबर, आयरन, विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट्स से युक्त होती है। इसके साथ ही हल्दी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अलावा मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने का काम करती है। लेकिन क्या आपको पता है हल्दी शुगर पेशेंट के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। अगर इसका ठीक तरह से इस्तेमाल किया जाए तो ये ब्लड शुगर लेवल को काबू में कर सकती है। जानिए हल्दी को शुगर पेशेंट किन पांच तरीकों से इस्तेमाल करके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित कर सकते हैं।

1. हल्दी और दालचीनी भी असरदार
दूध के साथ हल्दी और दालचीनी का सेवन भी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में असरदार है। दालचीनी में कई औषधीय तत्व होते हैं। रोज सुबह अगर दूध के साथ इन दोनों चीजों का सेवन किया जाए तो ये डायबिटीज पेशेंट के लिए लाभदायक होगा।

2. हल्दी के साथ आंवला
हल्दी और आंवला दोनों ही सेहत के लिए लाभदायक होता है। लेकिन क्या आपको ये पता है इन दोनों का कॉम्बिनेशन भी सेहत के लिए बेहतरीन होता है। आंवले में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है। ये कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है। इसके साथ ही आंवला और हल्दी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में असरदार है। इसका सेवन बस दूध के साथ करें। आंवले में क्रोमियम होता है जो कार्बोहाड्रेट को डाइजेस्ट करने में मदद करता है। जिससे शुगर लेवल अपने आप काबू में रहता है।

3. डायबिटीज पेशेंट रोजाना इस पत्ती का पिएं जूस, अपने आप काबू में रहेगा ब्लड शुगर लेवल

4. काली मिर्च और हल्दी
काली मिर्च और हल्दी को अगर एक गिलास दूध में मिलाकर पिएं तो ये ब्लड शुगर पेशेंट के लिए लाभदायक होता है। काली मिर्च एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है।

5.अदरक और हल्दी
अदरक और हल्दी को एक साथ खाना भी डायबिटीज पेशेंट के लिए लाभकारी है। अदरक कई गुणों से युक्त होती है। कई अध्ययन की मानें तो अदरक ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मददगार है। मधुमेह के पेशेंट एक गिलास हल्दी वाले दूध में अदरक मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं।

हल्दी एक मसाला ही नहीं औषधि भी है जिसके पास गुणों का खजाना है। हमारी सनातन संस्कृति में हल्दी को पवित्र माना गया है। इसका लाभ की जितनी चर्चा की जाए कम है। विदेशों में वैज्ञानिकों द्वारा इस पर खोज जारी है ।

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