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वीर नमन

 

पूत चले सीमा पर,
पसीने से तर-तर ,
संकट को देखे नहीं,
आगे बढ़े वीर हैं ।।

घर बार छोड़ चले ,
चोंटीयों में उम्र ढले,
रिश्ते नाते छूटे कहीं,
बहे आँख नीर है ।।

बर्फीले पहाड़ो में ,
हिंसक दहाड़ों में,
हरे चाहे प्राण वहीं,
डरे नहीं धीर है ।।

सीना पर गोली दगे ,
मानो जैसे साँसे ठगे,
गिर पड़े भूमि पर ,
सहे पूत पीर है ।।

पुष्पा गजपाल पीहू

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