ब्रेकिंग न्यूज़
हेल्थ

विटामिन एफ की कमी को कैसे दूर करें

क्या आप विटामिन-एफ की कमी से ग्रसित हैं तो इसे दूर करने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजें-

अलसी ओमेगा 3 फैटी एसिड का प्रमुख स्त्रोत है।

विशेषज्ञों की मानें तो विटामिन-एफ फैटी एसिड का संयुक्त मिश्रण है। यह लिनोलेनिक एसिड और लिनोलिक एसिड से मिलकर बना है। शरीर में फैटी एसिड की कमी को विटामिन-एफ की कमी कहा जाता है। इस विटामिन की खोज साल 1920 में हुई थी।

आधुनिक समय में सेहतमंद रहना किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए सेहत का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसके लिए सही दिनचर्या का पालन करें, संतुलित आहार लें, रोजाना वर्कआउट करें और तनाव से दूर रहें। संतुलित आहार लेने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है। इन पोषक तत्वों में एक विटामिन-एफ है। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है और तनाव से निजात मिलता है। वहीं, इसकी कमी से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विटामिन-एफ की कमी दूर करने के लिए डाइट में फैटी एसिड युक्त चीजों को शामिल करना चाहिए।

आखिर विटामिन-एफ क्या है?

विशेषज्ञों की मानें तो विटामिन-एफ फैटी एसिड का संयुक्त मिश्रण है। यह लिनोलेनिक एसिड और लिनोलिक एसिड से मिलकर बना है। शरीर में फैटी एसिड की कमी को विटामिन-एफ की कमी कहा जाता है। इस विटामिन की खोज साल 1920 में हुई थी। जब वैज्ञानिकों की एक टीम शोध में जुटी थी। उस समय वैज्ञानिकों को विटामिन-एफ का पता चला था। विटामिन-एफ यानी लिनोलेनिक एसिड और लिनोलेनिक एसिड शरीर के लिए बहुत अहम होता है। इसके लिए रोजाना निर्धारित मात्रा में फैटी-एसिड युक्त चीजों का सेवन करें।

ओमेगा-3 फैटी

फैटी फिश यानी तैलीय मछली में उच्च मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेटिव, एंटी-कार्सिनोजेनिक के गुण पाए जाते हैं। ये गुण मस्तिष्क को सभी प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं। इसके लिए साल्मन, टूना, हेररिंग्स मछलियों का सेवन कर सकते हैं।

अलसी

अलसी ओमेगा 3 फैटी एसिड का प्रमुख स्त्रोत है। ओमेगा 3 फैटी एसिड, आंखों की रेटिना को स्वस्थ रखने के लिए कारगर तत्व है। इसलिए, अलसी की बीज आखों के लिए लाभदायक माना जाता है। साथ ही अलसी दिल और ब्लड शुगर लेवल के लिए फायदेमंद होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण भी पाए जाते हैं। इससे इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम के प्रभाव कम होता है।

कद्दू के बीज

इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स, जिंक, मैग्नीशियम और फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो न केवल डायबिटीज, बल्कि दिल की बीमारियों, मोटापे, बालों की परेशानियों और अनिद्रा में दवा की तरह काम करते हैं। सेहतमंद रहने के लिए आप कद्दू के बीज का सेवन कर सकते हैं। फैटी एसिड से विटामिन-एफ की कमी दूर होती है।

स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

संबंधित पोस्ट

दैनिक राशिफल……31 जुलाई, 2020, शुक्रवार

पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के पहले कोच अशोक मुस्तफी का निधन

आँखो की बीमारी बढ़ाए ऑनलाइन पढ़ाई

Hindustanprahari

कौन से फल होते हैं डाइबटीज में घातक ?

Hindustanprahari

दस्त की समस्या से कैसे करें बचाव

Hindustanprahari

दांत हो रहे हैं खराब तो अब आपको घर बैठे डॉक्टर्स बताएंगे उपचार, बस करना होगा यह काम