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योग सतत जीवन आधारा

योग करत नित दिवस बिताओ।
योगी बन सब योग सिखाओ।।
निज जीवन का यह अनुशासन ।
योग करो नित लेकर आसन ।।

रोग रहित हो जीवन सबका ।
कलह हरे योगी के मन का ।।
तन में रोग निकट नहि आवे।
काया ऊर्जावान बनावे।।

नित योगी बन कर सब जीना ।
फिर तन-मन सब होत प्रवीना ।।
बल संचार हृदय में करते।
प्रसन्नता, चंचलता रहते ।।

बुद्धि बलवती, पुष्ट शरीरा ।
तन से योगी हरे अधीरा।।
योग क्रिया नित देती आशा ।
नाश करे सब रोग, निराशा ।।

बढ़ती है मानव की क्षमता ।
हो जाती है दूर विषमता ।।
चित्त रहे सुंदर, सुविचारा।
योग सतत जीवन आधारा ।।

सरस्वती साहू
ग्राम-चिचिरदा, बिलासपुर(छ.ग.)

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