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मेडिकल कॉलेज में नौकरी के नाम पर घूसखोरी

​​​​​​​अलवर मेडिकल काॅलेज की भर्ती में घूस का खेल:एसीबी ने भर्ती करने वाली कंपनी के मालिक को पकड़ा, करोड़ों का लेन-देन सामने आया; 531 पदों में से 90 का रुपया ले चुके थे। सुबह चार बजे कार्रवाई में लगी रही ACB की टीम।

अलवर के एमआईए स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में करीब 531 पदों पर संविदा पर भर्ती करने वाली गुजरात की एमजे सोलंकी कंपनी ने शुरुआत में ही करोड़ों की डील कर ली। पहले चरण में करीब 108 पदों पर भर्ती होनी थी, जिसके लिए करीब 90 अभ्यर्थियों से पैसा भी ले लिया। ACB ने करीब 11 दिन की मशक्कत कर गुरुवार को अलवर, अजमेर व जोधपुर से करीब 20 लाख रुपए जब्त किए हैं। गुरुवार को पूरी रात कार्रवाई चली। अगले दिन शुक्रवार को सुबह साढ़े पांच बजे बाद ACB के अधिकारी व कर्मचारी विश्राम करने जा सके। भास्कर रिपोर्टर ने रातभर ACB की कार्रवाई को देखा।

अलवर से पकड़े गए भरत पूनिया व कानाराम।(अलवर से पकड़े गए भरत पूनिया व कानाराम)

गुजरात की कंपनी के मालिक मिनेश वसूली करके निकला
ACB के डीएसपी कमल नयन ने बताया कि अलवर से भरत पूनिया व कान्हाराम को गिरफ्तार किया है, जिनसे 4 लाख 50 हजार रुपए मिले हैं। एमजे सोलंकी कंपनी का मालिक मिनेश पटेल दिन में ही उनसे वसूली का 15 लाख रुपए लेकर जोधपुर निकला था। जिसे अजमेर के पास ACB ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं जोधपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत अलवर के निवासी महिपाल यादव से ACB ने 70 हजार रुपए जब्त किए हैं। बताया जा रहा है कि महिपाल अलवर का रहने वाला है, जिसकी जोधपुर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी है। जोधपुर मेडिकल कॉलेज में भी संविदा पर स्टाफ उपलब्ध कराने वाली एमजे साेलंकी कंपनी है। इस कारण महिपाल कंपनी के सम्पर्क में था। जो अलवर के अभ्यर्थियों को भरत पूनिया के पास भेजता था।

मिनेश दूसरी बार लेकर गया था रुपया
मिनेश दूसरी बार अलवर आया था। इससे पहले भी करीब 15 लाख रुपए लेकर जा चुका था। मतलब मिनेश ने ही अलवर में भर्ती के लिए भरत पूनिया को कॉर्डिनेटर लगाया था। जो मूल रूप से जोधपुर का रहने वाला है। पूनिया के पास महिपाल सहित कई अन्य लोगों के जरिए अभ्यर्थी पहुंचे थे, जिनसे मोटी रकम वसूली गई है। अब तक 90 लोगों से करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए वसूले जा चुके थे।

ये नकदी अलवर में पूनिया से जब्त की। इससे 14 लाख 50 हजार रुपए दिन में ही ले जा चुका।

नर्सिंगकर्मी के पद के 80 से 90 हजार, बड़े पद के 2 लाख तक लिए
ACB के अधिकारियों ने बताया कि नर्सिंगकर्मी पद के लिए करीब 80 से 90 हजार रुपए लेते थे। इससे बड़े पद के 2 लाख रुपए तक वसूले हैं। रिश्वत की राशि पद के वेतन के आधार पर तय थी। अभ्यर्थी से पद के वेतन का चार से पांच गुना राशि पहले ही ले रहे थे। पूनिया अभ्यर्थियों को यही कहता था कि यह कंपनी की पॉलिसी है। हर अभ्यर्थी को संविदा पर नौकरी तभी मिल सकती है जब वह उसे मिलने वाले वेतन का चार गुना पैसा पहले कंपनी को देगा। इसके एवज में कोई रसीद नहीं देते थे। यह वसूली का तरीका था।

करीब 31 तरह के पद पर भर्ती
मेडिकल कॉलेज में छोटे से बड़े करीब 31 तरह की पोस्ट पर भर्ती होनी है, जिनके कुल 531 पद बताए गए हैं। हरेक पद का वेतनमान अलग-अलग है। पे स्केल अच्छा होने के कारण अभ्यर्थियों से आसानी से वेतन का चार गुना दाम पहले लेने लगे। कुछ ही दिनों में 90 अभ्यर्थियों से एक करोड़ रुपए से अधिक ले चुके थे। ACB की कार्रवाई नहीं होती तो 531 पदों के एवज में करोड़ों रुपए वसूलने की तैयारी थी। पूनिया ने इतना जरूर कहा कि ज्यादा पद वीआईपी कोटे से भरने में लगे थे। पैसे कम लोगों से लिए हैं। वीआईपी का मतलब अधिकारी व नेता से है।

रात 2 बजे मेडिकल कॉलेज के डीन व अन्य अधिकारियों के चैंबर सील करती टीम।

रात 2 बजे चैंबर सील, सुबह 4 बजे रुपयों की गिनती
ACB की टीम ने रात भर कार्रवाई की है। रात करीब 2 बजे मेडिकल काॅलेज में डीन, एडी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के 7 चैंबर सील किए हैं। इसके बाद आरोपियों को होटल लेकर आए हैं। यहां सुबह 5 बजे तक पैसे की गिनती सहित अन्य कागजी काम हुआ है।

नेताओं के नाम भी आ रहे
अपने परिचित अभ्यर्थियों को संविदा पर नौकरी दिलाने के लिए अलवर के श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली, सांसद बालकनाथ के पीए कुलदीप उर्फ गुरुजी, पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने पूनिया को फोन किए हैं। वाट्सऐप पर अभ्यर्थियों की सूची भेजी है। उनसे पैसे की लेन-देन की पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले में ACB के अधिकारियों का कहना है कि यह जांच का विषय है। पूर्व विधायक आहूजा ने केवल एक बार ही बात की थी। सांसद बालकनाथ के पीए कुलदीप यादव के मामले में ACB के अधिकारियों ने कहा कि मोबाइल चैट के आधार पर राशि लेने की बात शुरुआत में सामने आई थी, बाद में यह भी लगा कि वाट्सऐप पर अभ्यर्थियों की संख्या लिखी थी, राशि नहीं। इस मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि सांसद के पीए ने 9 अभ्यर्थियों की सूची भेजी थी। पूनिया ने कहा था कि हम 4 अभ्यर्थियों को लगा सकते हैं। इस पर पीए ने वापस जवाब भेजा था कि 4 नहीं 5 तो लगाओ। फिर भी इस मामले की जांच के बाद ही असलियत सामने आ सकेगी।

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