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महिला मुख्यमंत्री के राज में महिलाओं का यौनशोषण और हिंसा

बंगाल: हाल ही में पश्चिम बंगाल में चुनाव हुआ जिसमें टीएमसी पार्टी ने बीजेपी को हराकर जीत हासिल की और एक बार फिर ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी. लेकिन इस जीत के बाद बंगाल हिंसा की आग में दहक गया. जिसमें एक महिला के राज में महिलाओं को ही अधिक भुगतना पड़ रहा है.

पश्चिम बंगाल की कई महिलाओं ने सामूहिक रूप से याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव बाद हुई हिंसा में उनके साथ रेप किया गया, याचिकाकर्ताओं में एक नाबालिग युवती भी शामिल है

विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में जिस तरह की हिंसा हुई थी अब उसकी हैरान करने वाली और दिल को झकझोर देने वाली कहानियां सामने आई हैं. पश्चिम बंगाल की कई महिलाओं ने सामूहिक रूप से याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव बाद हुई हिंसा में उनके साथ रेप किया गया, याचिकाकर्ताओं में एक नाबालिग युवती भी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त बंगाल की हिंसा की एसआईटी जांच की मांग करने वाली कई याचिकाएं दायर हैं, इस बीच इन महिलाओं ने अपनी याचिका दायर कर मामला सुने जाने की अपील की है. याचिका में अपील की गई है कि सर्वोच्च अदालत सीबीआई या एसआईटी जांच का आदेश दे, जिसकी निगरानी सर्वोच्च अदालत ही करे.

‘पोते के सामने किया गया रेप’, याचिका में बयां किया दर्द
सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं, इनमें से एक याचिका 60 साल की महिला ने दायर की है. अपनी अपील में महिला ने दर्दनाक मंजर को बयां किया है. महिला का आरोप है कि उसका गैंग रेप किया गया, वो भी 6 साल के पोते के सामने और हमलावरों द्वारा उसकी बहू को भी पीटा गया था.

याचिका में कहा गया कि तीन मई को जब चुनाव के नतीजे आ चुके थे, तब 100-200 लोगों की भीड़ उनके घर के पास पहुंची. जो कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थक थे, उन्हें घर खाली करने को कहने लगे. उसी वक्त उनकी बहू को पीटा जाने लगा. इसके बाद चार मई को रात करीब साढ़े बारह बजे, टीएमसी के पांच कार्यकर्ता आए और घर के अंदर घुस गए.

याचिका में आरोप लगाया गया कि बुजुर्ग महिला को मारा गया, उसके हाथ-पैर बांध दिए गए और फिर रेप किया गया. ये सब महिला के 6 साल के पोते के सामने हुआ. महिला का दावा है कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है’.

एक अन्य याचिका में बताया गया है कि 17 साल की युवती को चार लोगों ने पास के जंगल में घसीट लिया और करीब एक घंटे तक उसके साथ रेप किया. याचिकाकर्ता का दावा है कि उसके परिवार की राजनीतिक और धार्मिक विचारधारा की वजह से उसे निशाना बनाया गया.

युवती ने भी अपनी याचिका में पुलिस की नाकामी का आरोप लगाया है और टीएमसी के नेताओं पर धमकाने का आरोप लगाया है. युवती का कहना है कि उसे चाइल्ड वेलफेयर होम में भेज दिया गया और परिवार से नहीं मिलने दिया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक और याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने की बजाय उनको बचाने में लगी हुई है. याचिकाकर्ताओं ने अपनी अपील में मांग की है कि सभी मामलों को एसआईटी को सौंपा जाए और मामले की पूरी सुनवाई राज्य के बाहर की जाए.

बंगाल में चुनावों के बाद हुई हिंसा का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में भी है. बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट को 25 मई को बताया कि उनकी सरकार ने इन केस में एफआईआर दर्ज की है, साथ ही कई गिरफ्तारी भी हुई हैं. वहीं, मानवाधिकार आयोग ने अदालत को जानकारी दी है कि इन मामलों में कई जगह अधिकारों का उल्लंघन हुआ है.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं को लेकर बंगाल सरकार ने सर्वोच्च अदालत में अपना जवाब दिया है. बंगाल सरकार का कहना है कि अभी ये मामले हाईकोर्ट में सुने जा रहे हैं. जो आरोप लगाए गए हैं, वह सभी राजनीति से प्रेरित हैं, पुलिस प्रशासन राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ मिलकर काम कर रहा है.

बंगाल सरकार का कहना है कि एफआईआर दर्ज की गई हैं, साथ ही हिंसा की जांच भी हो रही है. जब आचार संहिता हट गई थी, उसके बाद हालात में सुधार हुआ है. राज्य सरकार इन मामलों में एक निष्पक्ष जांच कर रही है.

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