ब्रेकिंग न्यूज़
साहित्य

परशुराम

 

परशुराम को आना होगा।
रंगत जरा दिखाना होगा।।
कितनी लाशें कहां बह गईं ।
इसका पता लगाना होगा ।।

लापरवाही कहां हुई है।
इस पर प्रश्न उठाना होगा ।।
परस उठाने से पहले कुछ।
मंगल मंत्र जगाना होगा ।।

जितना भी अपमान हुआ है ।
सबका याद दिलाना होगा।।
कौन जाति है दमन कर रही।
उसको सबक सिखाना होगा ।।

ब्रह्म तेज ले करके अब तो ।
ब्राह्मण को उठ जाना होगा।।
युग रूपा कहते हैं जिनको ।
उनको तो जग जाना होगा।।

फूल सुधारों के मौसम में ।
कुछ तो शस्त्र उठाना होगा।।
सर से बचों श्राप से मारों ।
यही मंत्र अब लाना होगा ।।

विप्र रूप धारण करके ही।
सारा काम बनाना होगा।।
छल प्रपंच करने वालों को ।
अच्छा पाठ पढ़ाना होगा ।।

इस्तेमाल किया है जिसने ।
उसको दूर भगाना होगा ।।
डंड कमंडल परसा लेकर ।
पापी को दौड़ाना होगा ।।

क्रोध अग्नि में दुर्बासा बन ।
सारा झूठ जलाना होगा ।।
सच्चाई में प्राण प्रतिष्ठा ।
करना है और कराना होगा ।।

परशुराम को आना होगा ।
रंगत जरा दिखाना होगा ।।

कवि हौंसला अन्वेषी

संबंधित पोस्ट

क्षिप्रा (शिप्रा) नदी

Hindustanprahari

मार्कण्डेय त्रिपाठी की पंक्ति “वर्षा ऋतु”

Hindustanprahari

काव्यसृजन संस्था की ओर से कविवर पं.श्रीधर मिश्र का जन्मोत्सव मनाया गया

Hindustanprahari

मार्कण्डेय त्रिपाठी की पंक्ति “विश्वकर्मा पूजा”

Hindustanprahari

वरिष्ठ फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय को मिला ‘राष्ट्रीय सेवा सम्मान’ अवार्ड

Hindustanprahari

मार्कण्डेय त्रिपाठी की पंक्ति “कृष्ण वियोग”

Hindustanprahari