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 जीवन में योग का महत्व 

 

बढ़ता विद्या बुद्धि योग से,
धीर ,वीर बने सजग जवान ।
स्वस्थ्य रहे तन-मन से मानव ,
बनते जन तन्दरुस्त महान ।

रहे दूर राक्षसी भोग से ,
योगी बन पाएँ सम्मान ।
योग है जीवन का सिद्धांत ,
योग जीव का बनता मितान ।।
सुंदर यौवन सजे मनुज मन,
देता योग नवल पहचान ।
बढ़ता विद्या बुद्धि योग से,
धीर ,वीर बने सजग जवान ।।

जागें मानव मिल योग करें ,
योग से तन निरोग बनाएँ ।
करें निष्काम कर्म साधना ,
अंतस मन में प्रेम जगाएँ।
भोर भये शुभ शाम सबेरे ,
प्रभुवर का करलें गुणगान ।
बढ़ता विद्या बुद्धि योग से,
धीर ,वीर बने सजग जवान ।।

तन – मन संस्कारी हो जाता ,
गीत खुशी का भरता सरगम।
योगी मन निर्मल काया हो ,
बीमारी का रहे नहीं गम ।
कमल खिले मुख सुंदर आभा।
योग से रहे नहीं अनजान ।
बढ़ता विद्या बुद्धि योग से,
धीर ,वीर बने सजग जवान ।।

पुष्पा गजपाल “पीहू”
महासमुंद (छ. ग.)

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