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जानें क्‍या है सिजोफ्रेनिया ? अब इलाज भी हुआ आसान

सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का सटीक पता लगाना अब भी वैज्ञानिकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा ने इस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित इम्पासिज नामक उपकरण तैयार किया है। परीक्षण के दौरान इस उपकरण ने सिजोफ्रेनिया के 87 फीसद मरीजों में बीमारी का सटीक पता लगाया।

सिजोफ्रेनिया के मरीज वास्तविक दुनिया से कट जाते हैं। इस बीमारी से ग्रसित दो मरीजों के लक्षण हर बार एक जैसे नहीं होते। ऐसे में इस बीमारी का पता लगाना कठिन हो जाता है। भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि एआई तकनीक से इसका सटीक पता लग सकता है। इम्पासिज को सिजोफ्रेनिया से ग्रसित ऐसे मरीजों का डाटा लेकर बनाया गया है जो उस वक्त कोई दवा नहीं ले रहे थे। इससे शुरुआत में बीमारी का पता लग सकता है।

सिजोफ्रेनिया के मरीजों में कुछ विशेष तौर से दिखने वाले लक्षण कैटेटोनिक कहे जाते है। इसमें व्यक्ति ज्यादा चलता फिरता नहीं है और किसी भी निर्देशों का पालन नहीं कर पाता है। इसकी चरमता पर ऐसे व्यक्ति मोटर की गतिविधियों की अत्यधिक और अजीब सी आवाज निकालकर नकल उतारते है। इसे कैटेटोनिक उत्साह कहा जाता है।

सिजोफ्रेनिया के लक्षण
इलाज में मार्डन तकनीकी की वजह से पहले की तुलना में अब कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया कम पाया जाता है। सिजोफ्रेनिया की बजाय कैटेटोनिक को न्यूरोडेवलेपमेंटल (एक ऐसी स्थिति जो बच्चे के तंत्रिका तंत्र को विकसित करने के समय प्रभावित करती है), साइकोटिक बाइपोलर, और डिप्रेसिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक बीमारियों में ज्यादा देखा जाता है। कैटेटोनिया के रोगी को अत्यधिक और कम मोटर गतिविधि के बीच में देखा जा सकता है। माडर्न तकनीकी की वजह से कैटेटोनिक सिजोफ्रेनिया के मरीज अपने लक्षणों को आसानी से समझने लगे है, जिससे उनकी जिंदगी पहले से बेहतर हो गई है।

सिजोफ्रेनिया के कारण

जेनेटिक्स- सिजोफ्रेनिया का इतिहास रखने वाले परिवार में इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा ज्यादा रहता है।

वायरल संक्रमण – कुछ अध्ययनों के अनुसार वायरल संक्रमण के कारण बच्चों में एक प्रकार का पागलपन के विकास होने की संभावना ज्यादा रहती है।

भ्रूण कुपोषण – अगर गर्भावस्था के दौरान भ्रूण कुपोषण से ग्रस्त है, वहाँ एक प्रकार का पागलपन विकसित होने का अधिक खतरा है।

प्रारंभिक जीवन के दौरान तनाव – प्रारंभिक जीवन मेंगंभीर तनाव के कारण एक प्रकार के पागलपन के विकास होने का खतरा रहता है।

जन्म के समय माता-पिता की आयु – ज्यादा उम्र के माता पिता के बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा रहती है।

सिजोफ्रेनिया का इलाज

सिजोफ्रेनिया एक ऐसी स्थिति है जो सारी जिंदगी रहती है, हालांकि कैटेटोनिक लक्षण हमेशा रहे ऐसा जरूरी नहीं है। सिजोफ्रेनिया के मरीजों को एक स्थायी आधार पर उपचार की आवश्यकता होती है ; यहां तक ​​कि जब लक्षण गायब हो जाये और रोगी को लगने लगे वे बेहतर हो गए हैं। सभी प्रकार के सिजोफ्रेनिया का इलाज एक ही तरीके से किया जाता है। बीमारी के तथ्यों, गंभीरता और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज के तरीकों में अंतर हो सकता है।

मानसिक रोग के घरेलु उपचार

मानसिक रोग एक तरह विकार है जो मस्तिष्क से जुड़ा होता हैं। यह विकार व्यक्ति के व्यवहार, सोचने व समझने की शक्ति को प्रभावित कर देते हैं। मानसिक रोग में अक्सर व्यक्ति में चिंता, तनाव, किसी वस्तु की अधिक लत या पागलपन हो जाना आदि हो जाता हैं। इसके अलावा कुछ लोगो में मानसिक स्वास्थ्य समस्या हमेशा होती रहती है, किंतु यदि मानसिक स्वास्थ्य समस्या मानसिक रोग में बदलने लगे तो अधिक गंभीर समस्या मस्तिष्क में उत्पन्न हो सकती हैं। इस वजह से मस्तिष्क के कार्य करने की क्षमता कम होने लगती हैं। मानसिक रोग से डरने की नहीं बल्कि उचित उपचार करने की आवश्कयता हैं। कुछ ऐसे घरेलु उपचार है जिनकी सहायता से लक्षण को कम कर सकते है और मस्तिष्क को शांत भी कर सकते हैं। चलिए आज के लेख में आपको मानसिक रोग के घरेलु उपचार के बारे में बताएंगे।

मानसिक रोग के उपाय ?

मानसिक रोग के घरेलु उपचार पाने के लिए कुछ निम्न उपाय अपना सकते है। चलिए विस्तार से बताते हैं।

मानसिक रोग से बचाव करने के लिए इनके लक्षणो पर ध्यान देने की जरूरत है। लक्षणो में क्या महसूस हो रहा है और तबियत कितना बिगड़ रही है। आप क्या नहीं कर पा रहे है। इन लक्षण को आसानी से दूसरे को बता सकते है। यदि आपको समझ रहा है तो आपकी मदद कर सकता है और जो आपका मजाक बनाते है उनसे दूरी बनाएं रखें।

यदि आपके दिमाग में बदलाव होते रहते है, तो अपने पर नियंत्रण रखे और एक डायरी पर अपने साथ होने वाली समस्या को लिखे की आपको क्या अच्छा और बुरा लगता है। इसके अलावा कुछ चीजों में फेरबदल कर कुछ हद तक ठीक कर सकते है। आपका दिमाग में भी शांति रहेंगी।

अपने अंदर व्यक्ति को आत्मविश्वाश अधिक बढ़ाने की जरूरत होती है ताकि किसी भी व्यक्ति के बातो से आपका मनोबल कम न हो और आगे की ओर बढ़ते जाएं।

मानसिक रोग से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को दुसरो की सहायता करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को खुशी व सुकून मिलता है और अपने मानसिक तनाव को भूल जाता है। इससे एक भावनात्मक क्रिया उत्पन्न होती है जो तनाव व चिंता से दूर रखता है। इससे आप जैसे भी है अपने आप को बेहतर समझते है और कही भी रहकर कार्य कर सकते है। आप अलग-अलग लोगो से मिलते है और अनुभव लेते है। सहायता से नई-नई जानकारी मिलती है। सभी तरह से दिमाग को व्यस्त रख सकते है।

मानसिक रोग से छुटकारा पाने के लिए अपने परिवार का साथ होना जरुरी होता है। परिवार के सहयोग होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और नए कार्य करने में उत्सुकता होती है। परिवार व रिश्तेदारों से जुड़े रहने पर आप अपने आप व्यस्त कर सकते है। आपको तनाव भी मह्सुश नहीं होगा और अपने अंदर के दुख व सुख को सांझा कर सकते है। तकनीक का जमाना है, तो विडिओ कॉल या चाट से बात कर सकते है। यदि आपके परिवार में दोस्त साथ नहीं देते है तो किताबो का सहारा ले सकते है। इसके अलावा किताब क्लब में शामिल होकर अन्य लोगो से संपर्क कर सकते है।

मानसिक रोग से बचने के लिए कुछ गतिविधिया कर सकते है, जिससे तनाव से छुटकारा पा सके। ये गतिविधिया आप खुद आजमा सकते है ।

आपको क्या अधिक अच्छा लगता है और किस कार्य में आप अधिक रूचि रखते है, इससे मस्तिष्क को आराम मिलता है। जैसे आपको बाहर टहलना पसंद है या अपने कुत्ते को बाहर लेकर टहलने में आनद आता है तो आप वही कार्य करे। इसके अलावा कुछ लोगो को चित्र कला में रूचि होती है तो उनको वह कार्य करना चाहिए। हालांकि इन सब कार्यो के लिए कुछ समय जरूर निकाले।

अपने मस्तिष्क को एक ही समय पर बहुत सी चीजों पर नहीं लगाएं, ऐसा करने से मानसिक विकार को बढ़ावा मिलता है इसलिए एक ही कार्य में दिमाग लगाना चाहिए और तनाव को जितना हो सके दूर रखने की कोशिश करे। कुछ लोगो के अनुसार माइंडफूलनेस मूड और रिएक्शन को होने से रोकते है लेकिन हर बार कारगर साबित नहीं होता है।

बहुत लोग शहर में रहकर प्राकृतिक नजारा नहीं ले पाते है। जैसे ग्रमीण जगह पर लोग काफी स्वस्थ रहते है क्योकि उनको ताजी हवा और प्रदूषण कम मिलता है। शहर में लोग जल्दी पार्क में नहीं जाते है और घर में पालतू पशु जानवर नहीं रख पाते है ताकि कुछ समय बिता सके।

मानसिक रोग के घरेलु उपचार के लिए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरुरी होता है। ताकि मासिक समस्या को कुछ हद तक ठीक कर सके। जैसे अपनी नींद को पूरा करना यानि कम से कम 7 घंटे की नींद लेना चाहिए।

रोजाना जल्दी उठकर व्यायाम यानि हल्के व्यायाम और कुछ दूर पैदल चलना आदि करना चाहिए। आप चाहे तो योगा या स्विमिंग कर सकते है। इसलिए आप वोई व्यायाम चुने जिसमे आपको बहुत मजा आता है। यदि आप शारीरिक रूप से अपंग है तो चिकिस्तक से बात करें।

शराब और ड्रग्स का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि नशीली चीजे से मासिक तनाव और बढ़ता है। इस वजह मासिक रोग को बढ़ावा मिलता है। आप चिकिस्तक की मदद से छुटकारा पाने में मदद ले सकते है।

अपने भोजन पर विशेष ध्यान नहीं रखना जरूरी है। आप किस समय भोजन करते है उसका ध्यान रखे और खासतौर पर पोषक तत्व से भरपूर आहार का सेवन करे। आप ऐसी कुछ चीजे का सेवन न करे जिससे आपको नुकसान हो।

अगर आपको मानसिक रोग की समस्या हो रही है, तो मनोचिकिस्तक (Psychiatrist) से संपर्क कर सकते है।

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