ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ हेल्थ

जन्मजात हृदयरोग पीड़ित बच्ची डायना को मिला जीवनदान

– गायत्री साहू

मॉरीशस से नवी मुंबई लायी गयी बेबी डायना ‘वाल्वुलर पल्मोनरी एट्रेशिया’ से पीड़ित थी

नवी मुंबई : भारत में हृदय रोगों की बढ़ती संख्या अब चिंता का विषय बन गया है और बढ़ती महामारी कार्डियो वैस्कुलर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए और भी बड़ा खतरा है। अब तक अपोलो हॉस्पिटल्स ने पिछले 16 महीनों में मॉरीशस के 60 से अधिक बच्चों का इलाज किया है। मॉरीशस से लायी गयी, 15 दिन की बेबी डायना पर नवी मुंबई के अपोलो अस्पताल में एक जटिल हृदय शस्त्रक्रिया सफलतापूर्वक की। बेबी डायना का जन्म 28 जुलाई 2021 को मॉरीशस में हुआ और पता चला कि बच्ची को जन्म से ही सायनोसिस (त्वचा, नाखून, होंठ या आंखों के आसपास का हिस्सा नीला या भूरा होना) था और उसे ‘वाल्वुलर पल्मोनरी एट्रेसिया’ का निदान किया गया था, यह जन्म के साथ ही पाया जाने वाला हृदय का ऐसा दोष है जिसमें हृदय से फेफड़ों तक के रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने वाला वाल्व बिल्कुल खुलता नहीं है। बेबी डायना को सरकार की मदद से और एक स्थानीय डॉक्टर के सहयोग से 12 अगस्त 2021 को मुंबई लाया गया। तुरंत, उसे स्थिर कर दिया गया और 24 घंटे से भी कम समय में उसे हृदय संबंधी प्रक्रिया के लिए कैथ लैब ले जाया गया। प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही, बेबी डायना को गंभीर कार्डियक अरेस्ट हुआ, जिससे उसे बचाने के लिए कई आपातकालीन कार्डियक के साथ तत्काल शॉक ट्रीटमेंट (4 से 6 शॉक्स दिए गए) की आवश्यकता थी।
प्रमुख डॉक्टर और अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई के कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ भूषण चव्हाण बताते हैं, जैसे ही बेबी डायना की हालत बिगड़ती गयी, उसे मॉरीशस सरकार द्वारा फ्लाइट से अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई में आगे के नैदानिक प्रबंधन के लिए रेफर किया गया। बेबी डायना की स्थिति गंभीर थी, वह उपचारों का कोई जवाब नहीं दे पा रही थी, इसलिए अंतिम उपाय के रूप में टेम्पररी पेसमेकर डाला गया और हृदय की धड़कन को 150/मिनट की दर से बनाए रखा। सीपीआर अभी भी जारी था और प्रक्रिया को रद्द किया गया। शॉक ट्रीटमेंट के बाद, अगले कुछ मिनटों में, बेबी के ह्रदय ने अपनी लय वापस पा ली और परिणामस्वरूप, पेसमेकर को हटा दिया गया। बेबी डायना को स्थिर करने के लिए एनआईसीयू में रखा गया। अगले 10 दिनों में, बच्चे ने सभी निओनेटल समस्याओं (एक्यूट किडनी फेल्योर) को दूर कर लिया और उसे सफलतापूर्वक एक्सटयूबेटेड किया गया। जैसा कि पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट ने मूल्यांकन किया, उसकी न्यूरोलॉजिकल क्रियाएं भी सामान्य हो रही थी, लंबी अवधि तक चले सीपीआर और कार्डियक अरेस्ट के बावजूद यह हो पाना एक और चमत्कार था। बेबी डायना के स्थिर होने के बाद पर्फोरेशन और बैलून पल्मोनरी वाल्वोटॉमी की ताकि डिफेक्टिव पल्मोनरी वाल्व खोला जाए।
अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई के सीओओ और यूनिट हेड संतोष मराठे ने कहा, जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) नवजात शिशुओं में सबसे आम जन्मजात विकार है और प्रत्येक 1000 शिशुओं में से लगभग 8 में यह विकार पाया जाता है। बेबी डायना का सफल इलाज हमारी संस्था के लिए गर्व की बात है। विश्व स्तर के विशेषज्ञों की हमारी टीम की वजह से अपोलो अस्पताल नवी मुंबई को बाल चिकित्सा हृदय देखभाल के लिए पश्चिमी भारत के सबसे उन्नत केंद्रों में से एक के रूप में जाना जाता है।

संबंधित पोस्ट

मरा हुआ बच्चा फिर से जी उठा

Hindustanprahari

मुंबई में कोरोना के चलते सील हुई बिल्डिंगों की संख्या हुई 1305

Hindustanprahari

देशभक्ति गीत ‘वंदे भारत’ की हुई रिकॉर्डिंग, डॉ राज सिंह हैं गीतकार

Hindustanprahari

दंगल टीवी पर लॉन्च होने जा रहा है ‘इश्क की दास्तान- नागमणि’

Hindustanprahari

मार्कण्डेय त्रिपाठी की पंक्ति “हिंदी दिवस”

Hindustanprahari

सांसद रविकिशन शुक्ला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मड़ाविया से मांगा गोरखपुर के लिए कैंसर अस्पताल

Hindustanprahari