ब्रेकिंग न्यूज़
हेल्थ

घर पर ऐसे करें लकवाग्रस्त मरीजों का इलाज

लकवा एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसके कारण शरीर का कोई अंग या आधा हिस्सा अपना काम करना बंद कर देता है और उस हिस्से में कोई भी हलचल महसूस नहीं होती है। इस बीमारी के कारण मुंह, होंठ या संबंधित अंग टेढ़े हो जाते हैं।

लकवाग्रस्त मरीजों को सामान्य एक्सरसाइज से भी आराम पहुंचाया जा सकता है। यह एक्सरसाइज परिजन घर पर ही मरीजों को करा सकते हैं।

लकवाग्रस्त मरीज नियमित रूप से खास व्यायाम करें तो उनके ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

लकवा दो तरह से मरीज को प्रभावित करता है शारीरिक और मानसिक। ऐसे में मरीजों को मानसिक गतिविधियां जैसे बोर्ड और कार्ड गेम, अंकों को जोडऩा, ब्लॉक को निकालना जैसे खेल या बागवानी, योगा, नृत्य जैसी शारीरिक क्रियाएं
कराई जानी चाहिए। इससे मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी कई क्रियाएं हैं जो मस्तिष्क को उत्तेजित करती हैं।

दिमाग के एक हिस्से को प्रभावित करता है स्ट्रोक

फिजियोथेरेपिस्टों का कहना है कि स्ट्रोक आमतौर पर दिमाग के एक हिस्से को प्रभावित करता है।

ऐसे में मरीज दिमाग के दूसरे भाग के इस्तेमाल से स्ट्रोक से आने वाली चुनौतियों को दूर कर सकता है। इसके लिए परिजन को भी मरीज का साथ देने की जरूरत होती है जो घर पर ऐसी क्रियात्मक क्रियाएं कराए।

लकवा के घरेलू उपचार…

पैरालिसिस यानि कि लकवे की बीमारी आजकल काफी सुनने को मिलती है। किसी की पूरी बॉडी पैरालिसिस का शिकार हो जाती है तो किसी की आधी बॉडी इस बीमारी के चपेट में आ जाती है। कुछ लोगों के शरीर के किसी विशेष अंग को भी पैरालिसिस हो जाता है।

अधिक टेंशन लेने से या अचानक कोई सदमा लगने से भी व्यक्ति पैरालिसिस का शिकार हो जाता है। क्योंकि जब अचानक कोई बड़ी घटना हो जाए, तो दिमाग पर इसका असर हो जाता है जिसकी वजह से तंत्रिका तंत्र नष्ट हो जाता है।

प्राकृतिक तरीका

बहुत कम लोग यह जानते हैं कि प्राकृतिक रूप से लकवा जैसी बीमारी का इलाज संभव है। प्राकृतिक चिकित्सा से हर प्रकार के लकवा रोग का उपचार पाया जा सकता है। केवल जरूरत है तो एक-एक करके इस रोग के कारण और उपचार को समझने की।

नींबू पानी का एनिमा
लकवा रोग को दूर करने का एक और इलाज मौजूद है, जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक है। इसके अनुसार पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले। क्योंकि पसीना इस रोग को काटने में सहायक होता है।

भापस्नान
एक अन्य उपाय के अनुसार लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए। स्नान के बाद उसे गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को, यानि कि जिस भाग को लकवा हुआ है केवल उसी भाग को ढकना चाहिए। यह करने के बाद अंत में कुछ देर के बाद उसे धूप में बैठना चाहिए। उसके रोगग्रस्त भाग पर धूप पड़ना बेहद जरूरी है।

गर्म चीजों का सेवन
लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इससे उसे रोग से लड़ने की शक्ति मिलेगी। लेकिन पैरालिसिस के जिन रोगियों को उच्च रक्तचाप की समस्या है, वे गर्म चीजों से पूरी तरह से परहेज करें।

रीढ़ की हड्डी को सही रखें
लकवा रोग से पीड़ित व्यक्ति को अपनी रीढ़ की हड्डी को दुरुस्त बनाए रखने की भी कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि मस्तिष्क की इंद्रियां यहीं से हो गुजरती हैं। यहां रोजाना गर्म या ठंडे पानी से सिकाई करनी चाहिए। जरूरी नहीं है कि गर्म पानी से ही सिकाई हो, यदि रोगी को ठंड़ा पानी सही लगे तो वह उससे भी सिकाई कर सकता है।

अन्य उपाय
प्राकृतिक चिकित्सा के भीतर एक और उपाय मौजूद है, जिसे लकवा रोग के मामले में रामबाण समझा जा सकता है। यह उपाय मिट्टी के प्रयोग से किया जाता है। आयुर्वेद ने मिट्टी को उत्तम माना है। क्या आप जानते हैं कि यह मिट्टी कैंसर जैसी बीमारियों को भी काटने की सक्षमता रखती है?

गीली मिट्टी का लेप
लकवा रोग को काटने के लिए लकवा रोग से पीड़ित रोगी के पेट पर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए। यदि रोजाना ना हो सके, तो एक दिन छोड़ कर यह उपाय जरूर करना चाहिए। इसके उसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। यदि यह इलाज प्रतिदिन किया जाए, तो कुछ ही दिनों में लकवा रोग ठीक हो जाता है।

ये भी है खास उपाय
इनके अलावा एक थोड़ा अनूठा उपाय भी है, लेकिन अगर सही तरीके से किया जाए तो इसकी सफलता में संदेह नहीं रहता।

इसके तहत लकवा रोग से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त पीले रंग की बोतल का ठंडा पानी दिन में कम से कम आधा कप 4-5 बार पीना चाहिए तथा लकवे से प्रभावित अंग पर कुछ देर के लिए लाल रंग का प्रकाश डालना चाहिए और उस पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से रोगी का लकवा रोग कुछ ही दिनों में ठीक तक हो जाता है।

खानापान का ध्यान रखें
इन उपायों के बाद अगले कुछ उपाय रोगी के खानपान से जुड़े हैं। यदि आगे बताए जा रहे खाद्य पदार्थों को रोगी की रोजाना डायट में जोड़ा जाए, तो उपरोक्त सभी उपाय अपना असर शीघ्र दिखाएंगे।

फ्रूट जूस
सबसे पहले रोगी को जितना हो सके फलों का रस पिलाएं। कम से कम 10 दिनों तक फलों का रस, नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए। इसका अलावा एक और खास प्रकार का रस है जिसमें अंगूर, नाशपाती तथा सेब के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर रोगी को पिलाना है।

पका हुआ ना खाएं
इसके अलावा रोगी को क्या नहीं खाना चाहिए यह भी जानना जरूरी है। रोगी को बाहर का तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा जब तक उसका उपचार चल रहा है और इलाज में कोई उन्नति ना दिखी हो, तब तक उसे पका हुआ भोजन बिलकुल ना दें।

ना लें स्ट्रेस
लकवे रोग के कारण मस्तिष्क का चाहे कोई भी भाग नष्ट हुआ है तो रोग के बढ़ने की संभावना बनी रहती है। इसलिए उपचार के दौरान रोगी के दिमाग को किसी प्रकार की कोई चोट ना पहुंचे, इस बात का खास ख्याल रखा जाना चाहिए।

नहीं तो उपाय हो जाएंगे असफल…
रोगी को किसी प्रकार का कोई मानसिक तनाव ना होने पाए, यह भी ध्यान रखें। यदि वह मानसिक रूप से स्वस्थ होगा, तो जल्द ही उसके ठीक होने की संभावना बनेगी। नहीं तो उपरोक्त बताए सही उपाय एक के बाद एक असफल होते चले जाएंगे।

लकवा के मरीजों के लिए डाइट प्लान :

आयुर्वेद में लकवा के इलाज की कई विधियाँ बताई गयी हैं साथ ही आहार और दिनचर्या में बदलाव से भी लकवा के असर को कम किया जा सकता है। आइये जानते हैं कि लकवा के मरीजों को अपने खानपान में क्या बदलाव लाने चाहिए।

लकवा के मरीज क्या खाएं

अनाज:   गेहूं, जौ, बाजरा

दालें:     मूंग दाल, कुलथ

फल एवं सब्जियां: हरी सब्जियां (पालक, सहजन), पत्ता गोभी, ब्रोकोली, अनार, फालसा, अंगूर, हल्दी, सेब, पपीता, संतरा, चेरी, तरबूज

लकवा के मरीज क्या ना खाएं

अनाज: नया अनाज, मैदा

दालें: अरहर, मटर, चना

फल एवं सब्जियां: आलू, टमाटर, नींबू, जामुन, करेला, केला, भिंडी, फूलगोभी

अन्य: तैल एवं घी का अत्यधिक सेवन, सुपारी, अत्यधिक नमक, पूरी, समोसा, चाट-पकोड़ा, मक्खन, आइसक्रीम, चाय, काफी।

भारी भोजन (छोले, राजमा, उड़द चना मटर सोयाबीन, बैंगन, कटहल) ठंडा भोजन, पनीर, चॉकलेट, तला हुआ एवं कठिनाई से पचने वाला भोजन

सख्त मना- तैलीय मासलेदार भोजन, मांसाहार एवं मांसाहार सूप, अचार, अधिक नमक, कोल्ड ड्रिंक्स, बेकरी उत्पाद, शराब, फ़ास्ट फ़ूड, शीतल पेय, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, जंक फ़ूड

लकवा के इलाज के दौरान अपनाएं ये डाइट प्लान

सुबह उठकर बिना ब्रश किये ही खाली पेट 1-2 गिलास गुनगुना पानी पिएं और नाश्ते से पहले आवंला व एलोवेरा स्वरस पियें।

डाइट चार्ट

समय

संतुलित  आहार योजना

नाश्ता (8 :30 AM )

1 कप दूध या पेय + 2-3 बिस्कुट /हल्का नमकीन/ दलिया /पोहा /उपमा (सूजी) /कार्नफ्लेक्स /अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स) / 2 पतली रोटी + 1 कटोरी सब्जी + फलो का सलाद (सेब, पपीता, चेरी, तरबूज आम, अनार, फालसा, अंगूर)

दिन का भोजन  (12:30-01:30 PM

2-3 पतली रोटियां + 1 कटोरी चावल (मांड रहित ) + 1 कटोरी हरी सब्जिया (उबली हुई ) + 1 कटोरी दाल (पतली ) + 1 प्लेट सलाद

शाम का जलपान           (5:30 – 6 :00 pm)

1 कप हर्बल चाय + 2-3 बिस्कुट /सब्जियों का सूप )

रात्रि का भोजन              (7: 00 – 8:00 Pm)

2-3 पतली पतली रोटियां + 1 कटोरी हरी सब्जियां (रेशेदार + 1 कटोरी दाल (पतली )

रात्रि से पूर्व (30 मिनट सोने से पहले )

1 गिलास दूध के साथ अश्वगंधा चूर्ण

सलाह: यदि मरीज को चाय की आदत है तो इसके स्थान पर 1 कप पेय ले सकते हैं |

लकवा के इलाज के दौरान अपनाएं ये जीवनशैली

सिर की मालिश करें।

पैरों को हल्के- हल्के दबाएं।

आराम करें।

लकवा के इलाज के दौरान ध्यान रखने वाली बातें

ताजा एवं हल्का गर्म भोजन करें।

भोजन धीरे धीरे शांत स्थान में शांतिपूर्वक, सकारात्मक एवं खुश मन से करें।

तीन से चार बार भोजन अवश्य करें।

किसी भी समय का भोजन छोड़ें नहीं और अत्यधिक भोजन से परहेज करें।

हफ्ते में एक बार व्रत करें।

अमाशय का एक तिहाई या एक चौथाई भाग खाली छोड़े अर्थात भूख से थोड़ा कम भोजन करें।

भोजन को अच्छी प्रकार से चबाकर एवं धीरे–धीरे खाएं।

भोजन करने के बाद 3-5 मिनट टहलें।

सूर्यादय से पहलें उठें (5:30 – 6:30 am)

प्रतिदिन दो बार ब्रश करें और नियमित रूप से जीभ की सफाई करें।

भोजन लेने के बाद थोड़ा टहलें और रात में सही समय पर नींद लें (9- 10 PM)।

योग और आसन से करें लकवा का इलाज

योग प्राणायाम एवं ध्यान: भस्त्रिका, कपालभांति, बाह्यप्राणायाम, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उदगीथ, उज्जायी, प्रनव जप

आसन: सूक्ष्म व्यायाम, उत्तानपादासन, मर्कटासन, भुजंगासन, शवासन, सर्वांगासन

संबंधित पोस्ट

कालीमिर्च

Hindustanprahari

जब पहली बार किसी गेंदबाज ने पूरी टीम को किया ढेर, 64 साल के बाद भी है विश्व रिकॉर्ड

डेली रूटीन में इन 3 एक्टिविटीज को शामिल कर, करें दिल की बीमारियों का खतरा कम

Hindustanprahari

डेल्टा वैरिएंट वायरस के खतरे से सरकार चिंतित

Hindustanprahari

कोरोना का डेल्टा वेरिएंट वैक्सिनेशन के बाद भी कर सकता है संक्रमित

Hindustanprahari

पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के पहले कोच अशोक मुस्तफी का निधन