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कोरोना का डेल्टा वेरिएंट वैक्सिनेशन के बाद भी कर सकता है संक्रमित

भारत में कोरोना महामारी की चपेट में आकर कई लोगों ने अपनी जान गवाई है। अधिकांश ठीक भी हुए हैं किन्तु कोरोना के आतंक से मुक्ति नहीं मिली है। कोरोना से बचने के लिए, कोरोना से बचाने वाली वैक्सीन भी आ गयी है और वैक्सिनेशन चल भी रहा है। किन्तु करोड़ों की आबादी वाले देश में सभी का जल्दी वैक्सिनेशन हो जाए अभी संभव नहीं है। कोरोना को रोकने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं किन्तु यह हर बार नए रूप में आकर डरा रहा है।

ब्लैक फंगस, फिर व्हाइट फंगस , फिर येल्लो फंगस और कई वैरिएंट कोरोना के मिल रहे हैं। फिर भी सरकार की आशा है, वैक्सिनेशन हो जाने पर कोरोना जानलेवा नहीं होगा। किन्तु अब एम्स की स्टडी में डेल्टा वेरिएंट पर नई जानकारी सामने आई है। इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के सहयोग से एम्स की की गई दो अलग-अलग स्टडी से पता चला है कि कोविड-19 का डेल्टा वेरिएंट (B.1.617.2) कोविशील्ड या कोवैक्सीन टीकों की एक या दोनों डोज लेने के बाद भी लोगों को संक्रमित कर सकता है। एम्स की स्टडी में 63 लोगों शामिल किया गया था, जिन्हें ब्रेकथ्रू इंफेक्शन था। इनमें से 36 ने दो डोज और 27 ने एक डोज दी गई थी।

इस अदृश्य कोरोना बीमारी से बचने के लिए सावधानी बेहद जरूरी है। मास्क लगाना, बार बार हाथ धोना, सोशल डिस्टेंस का पालन करना और वैक्सिनेशन करवाना बहुत जरूरी है। अपने लिए भी और अपनो के लिए भी।

 

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