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कोरोना काल में जरूरतमंदों के मसीहा बन गए शहंशाह अमिताभ बच्चन

मुंबई : वैश्विक कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन से आम जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। इस महामारी से लड़ने के लिए सरकार यथासम्भव प्रयासरत है। बॉलीवुड के सेलिब्रिटी भी सरकार के साथ खड़े हुए हैं साथ ही साथ अपने स्तर पर लोगों की भलाई के लिए उचित कदम उठा रहे हैं। इनमें से बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर जरूरतमंदों के मसीहा बनकर उभरे हैं।

मधुशाला के रचयिता छायावादी कवि हरिवंशरॉय बच्चन और तेजी बच्चन के सुपुत्र अमिताभ बच्चन को किसी पहचान की आवश्यकता नहीं। अमिताभ का नाम पहले इंकलाब रखा गया था लेकिन उनके पिता के साथी रहे कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उनका नाम अमिताभ रखा गया। सदी के महानायक चार पीढ़ियों के चहेते हैं। एक वर्ष के बच्चे से लेकर सौ वर्ष के वृद्ध के ये चहेते हैं। जब भी अमित जी बीमार हुए या उन्हें परेशानी आयी तो पूरा देश उनके लिए रोया और प्रार्थना किया। लोगों में उनके प्रति यह प्रेम केवल उनके अभिनय के कारण नहीं अपितु अमित जी का खुद लोगों से जुड़े हुए होने के कारण है। अमित जी का उदार चरित्र, सहिष्णुता की भावना और लोगों का सदा सहयोग करना उन्हें सबके हृदय में महान बनाता है। जब भी किसी ने मदद को पुकारा अमित जी हाज़िर रहे बस एक आवाज की आवश्यकता होती है। प्राकृतिक आपदाओं, हमारे देश के सैनिकों की सहायता या देश के किसी भी विषम परिस्थितियों में महानायक अग्रणी रहे। देश और देशवाशियों की आशा भरी नज़र को महानायक ने आंसुओं से भरने नहीं दिया, सदा मदद को तत्पर रहें।
अमित जी ने खुले दिल से सभी की सहायता की परंतु कुछ लोग अपवाद स्वरूप इनकी छवि बिगाड़ने में लगे रहे। अमित जी को अपने द्वारा दिए दान की चर्चा पसंद नहीं वे निःस्वार्थ भाव से सभी की मदद करने में विश्वास रखते हैं किंतु कई ट्रोलर्स इनकी इस भावना को अनदेखा कर इन्हें तंज करते हैं जिससे छुब्ध होकर अमिताभ बच्चन ने लिखा- ‘एक ने दिया और कह दिया कि दिया, दूसरे ने दिया और कहा नहीं कि दिया, दूसरी श्रेणी में ही रहने दो मुझे ऐ प्रियजन, जिसे मिला, वो क्या जाने किसने दिया। जानो उसका बस करुण क्रंदन। इन हालातों में और क्या कहा जाए, जो जानें मुझे, जानें, मैं तो सदा स्वभाव से ही रहा हूं कमसुखन (कम बोलने वाला)।’ बिग बी ने यहां अपनी कविता से काफी कुछ साफ कर दिया है।
लगभग डेढ़ साल से कोरोना महामारी से कई लोग आर्थिक रूप से कमजोर हो गए, कोई बीमारी का शिकार हुआ, तो किसी को दवा और ऑक्सीजन जैसे साधनों की जरूरत महसूस हुई। इन सारी समस्याओं को अमित जी ने आगे बढ़कर सुधार किया और यथासंभव जरूरतमंदो की मदद की, कभी धन के रूप में तो कभी आवश्यक साधन पहुंचाकर।
पिछले दिनों बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने दिल्ली के एक कोविड सेंटर के लिए दो करोड़ रुपये दान दिए हैं। इतना ही नहीं, बच्चन कोविड सेंटर के आयोजकों को फोन कर रोजाना सुविधाओं का जायजा लेते रहते हैं। इस बात का खुलासा दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक ट्वीट में किया गया है।


बाॅलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अब तक 15 करोड़ रुपये से अधिक धन दान किए हैं। उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो वह और राशि दान करने में पीछे नहीं हटेंगे। बार बार ट्रोलर्स के तंज कसने पर बिग बी ने ट्रोलर्स को जवाब देते हुए अपने ब्लाॅग में दान और मदद की जानकारी भी दी थी।
एक सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार हाल फिलहाल अमिताभ बच्चन में कई स्वतंत्र पत्रकारों की आर्थिक स्थिति का जायजा लेने के बाद तुरंत उनके अकाउंट में भारी राशि ट्रांसफर किया है जिससे इस कोरोना संकटकाल में आने वाले कुछ महीने उन सभी के परिवार को राहत मिल सके।
मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्होंने कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई में अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये का दान किया है और जरूरत पड़ने पर अपने ‘पर्सनल फंड’ से और योगदान करने में संकोच नहीं करेंगे।
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा – हां मैं चैरिटी करता हूं लेकिन हमेशा ये मानता हूं कि इसका खुलासा नहीं होना चाहिए। क्योंकि ऐसा करना शर्मिंदा करने वाली बात लगती है। मैंने हमेशा अपने दान के बारे में बात करने में एक झिझक और शर्म महसूस की है, भले ही मैं जिस भी पेशे से आता हूं और इस बात का मैंने हमेशा इल्म रखा है। लेकिन आज मुझे ये बताना पड़ रहा है कि मैंने क्या क्या और कहां कहां दान किया है।
अमिताभ बच्चन ने अपने निजी फंड से करीब 1500 किसानों का ऋण चुकाया गया जिससे आत्महत्या जैसा ख्याल भी किसी के मन में ना आए। जैसे ही आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश जैसी जगह से आत्महत्या की खबरों ने पैर पसारना शुरू किया, एक एक बैंक को फोन कर ऐसे लोगों को ढूंढा गया और बैंक प्रतिनिधियों के सामने उनके पैसे चुकाए गए और उनका ऋण खाता बंद किया।
हर किसान को उसके कागज़ात दिए गए कि अब उन पर कोई बकाया नहीं है और जो भी पैसे थे बैंक को उनकी तरफ से वापस कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के करीब 300 किसान मौजूद नहीं हो पाए थे। उनके लिए एक ट्रेन में एक बोगी बुक की गई थी 30 – 50 के करीब। वो उत्तर प्रदेश के अपने अपने शहरों से आए थे, उन्हें मुंबई में रिसीव किया गया, बसों में बैठाया गया, मुंबई दर्शन भी करवाया गया। उन्हें जनक के पास लाकर, खाना खिलाया गया और ऋण कैंसिल होने का सर्टिफिकेट दिया गया। फिर उन्हें वापस ट्रेन में बैठा कर घर रवाना किया गया। ये सब मेरे निजी खाते से किया गया।
इस देश के महान सैनिक जो बॉर्डर पर शहीद हुए, उनकी एक लिस्ट निकाली गई और उनके परिवारों को ढूंढा गया, उनकी पत्नी बच्चे, कुछ पत्नियां गर्भवती भी थीं, उन्हें आर्थिक सहायता दी गई। पुलवामा के भीषण आतंकवादी हमले के बाद उनके परिवारों को ढूंढकर जनक में लाया गया और उन्हें अभिषेक और श्वेता ने खुद सहायता प्रदान की।
जो लोग पिछले साल कोरोना से संक्रमित हुए थे उनमें 4 लाख दैनिक भत्ता मज़दूरों को एक महीने तक खाना पहुंचाया। शहर में रोज़ 5000 लोगों को दिन और रात खाना खिलाया।
पुलिस, अस्पताल में फ्रंट लाईन पर काम करने वालों को मास्क और पीपीई किट मुहैया करवाई गई वो भी हज़ारों की तादाद में अपने निजी फंड से। सिख समुदाय की भी मदद की जो रोज़ लाखों बेघर लोगों को घर वापसी में मदद कर रहा था। इंटर स्टेट बसों का इंतज़ाम करवाया। वहां ज़्यादातर ड्राईवर सिख थे।
जब प्रवासी भाई पैदल घर की ओर जा रहे थे बिना जूते चप्पल पहने, तब उन्हें चप्पल और जूते मुहैया करवाए। लोगों के पास सफर करने के साधन नहीं थे तो उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गांव तक 30 बसों का इंतज़ाम किया और रात के सफर के लिए उनके लिए खाने – पीने का इंतज़ाम किया।
मुंबई से उत्तर प्रदेश तक पूरी एक ट्रेन बुक करवाई जो कि 2800 प्रवासी भाईयों को मुफ्त में घर ले जाने के तैयार थी। बाद में जब गंतव्य स्टेशनों पर ट्रेन कैंसिल कर दी गई और रोक दी गई तो तुरंत ही इंडिगो की चार्टर्ड एयरप्लेन से हर फ्लाईट में करीब 180 प्रवासियों को यूपी, बिहार, राजस्थान और जम्मू कश्मीर के गांव तक पहुंचाया गया।
बिग बी के अनुसार जैसे ही कोरोना वायरस अपने पांव पसारने लगा एक पूरा डायगनॉस्टिक सेंटर तैयार करवाया जिसे दिल्ली के बंगला साहिब गुरूद्वारा में खोला गया दिल्ली सिख गुरूद्वारा मैनेजमेंट कमिटी के द्वारा। ये सेंटर उसी गुरूद्वारे के कैंपस में हैं और गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए मेरी क्षमता से परे था लेकिन एक MRI मशीन, सोनोग्राफी मशीन और बाकी स्कैन के ज़रूरी महंगे उपकरण, मेरे नाना, नानी और मां की याद में लगवाए गए।
एक 250 – 450 बेड क्षमता वाला सेंटर, आगे के दान से रकाबगंज साहिब गुरूद्वारा में चलाया जा रहा है और जल्दी ही इस सेंटर के लिए ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर उपलब्ध करवाने की कोशिश की जा रही है जो फिलहाल आसानी से नहीं मिल रहा है और इसकी काफी कमी है।
दिल्ली वासियों के लिए 50 पोलैंड से,150 अमेरिका से आक्सीजन सिलेंडर मंगवाकर ज़रूरतमंद अस्पतालों को दे दिए गए हैं।
बीएमसी और म्यूनिसिपल अस्पतालों को जिन्हें तुरंत वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ी, उन तक भी मदद पहुंचा दी गयी।
जुहू आर्मी लोकेशन के स्कूल हॉल में एक 25 – 50 बेड का अस्पताल सेट किया गया। रीतांभर स्कूल में फंड दान किया गया।
नानावटी अस्पताल को बहुत ही ज़रूरी कोरोना संक्रमण पहचानने वाली 3 मशीन डोनेट की गई है। इस समय बस्तियों और झुग्गियों में करीब 1000 लोगों के खाने पीने का ख्याल रखा जा रहा है।
जो बच्चे, कोरोना की वजह से अपने माता-पिता दोनों को खो चुके हैं और अंधकार में जा रहे हैं, उनमें से दो को गोद लिया है और हैदराबाद के एक अनाथालय में दाखिल किया है। 10वीं तक की उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च और अगर उनका भविष्य उज्जवल रहा, उनकी आगे की पढ़ाई का खर्च भी बिग बी उठाएंगे।

– गायत्री साहू

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