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काव्यसृजन महिला मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ चयन

काफी दिनों के मंथन के बाद कई प्रतिस्पर्धियों के नाम पर विचार करने के बाद काव्यसृजन महिला मंच की राष्ट्रीय अध्यक्षा के रूप में आर जे आरती सइया हिरांसी चयनित हो पदस्थापित हुईं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ इकाई की अध्यक्षा का चयन किया किया गया। छत्तीसगढ़ अध्यक्षा पद के लिए सौ.रश्मिलता मिश्रा का चयन किया गया। काव्यसृजन परिवार ने अपना कानूनी दाँव पेंच देखने समझने के लिए सर्वसम्मति से अधिवक्ता राजीव मिश्र को चयनित किया है।
आरती सइया, रश्मिलता मिश्रा व राजीव मिश्र ने पद ग्रहण करते हुए सबसे पहले काव्यसृजन परिवार को धन्यवाद देते हुए आभार ज्ञापित किया और कहा कि काव्यसृजन परिवार ने जो जवाबदारी हमें सौपी है, हम सभी मिलकर तन मन धन से उसका निर्वहन करेंगे। काव्यसृजन को साहित्य की दुनियाँ में नं. एक स्थान पर पहुँचाने के लिए जी जान लगा देंगे। साहित्य को भी विशेषतः हिन्दी व उसकी बहनों को उचित स्थान दिलाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेंगे। संस्थापक पं.शिवप्रकाश जौनपुरी के निःस्वार्थ प्रयास को हम लोग पर बनकर उड़ान भरने में बल प्रदान करेंगे।
हिरांसी ने कहा कि वैसे तो मैं साहित्यिक दुनियाँ में कई बड़े मंचों पर आई गई हूँ कइयों में कई पदों पर काम भी किया है,पर काव्यसृजन में जाने से आत्मिक संतोष प्राप्त होता है।इसलिए आज मैं काव्यसृजन महिला मंच की अध्यक्षा पद पाकर आत्मविभोर हूँ और परिवार को धन्यवाद देती हूँ कि परिवार ने मुझे राष्ट्रीय अध्यक्षा के काबिल समझकर ये जवाबदारी हमें सौंपी। मैं सपथ लेती हूँ कि आखिरी साँस तक परिवार की सेवा करूँगी।
रश्मिलता मिश्रा ने पद ग्रहण करते हुए कहा कि काफी समय से साहित्यिक दुनियाँ में भ्रमण कर रही हूँ कई संस्थाओं से जुड़ी हूँ। विश्व की नं.एक संस्था लायंस क्लब से जुड़ी हूँ। इसके बावजूद भी काव्यसृजन से जुड़ने के मोह को त्याग न सकी और काव्यसृजन से जुड़कर अब ऐसा लग रहा है जैसे सब कुछ पा लिया। काव्यसृजन साहित्य के क्षेत्र में जो अकल्पनीय कार्य कर रहा है प्रशंसनीय है।
राजीव मिश्र ने पद ग्रहण करते हुए कहा कि हिंदी व अन्य भाषाओं में परिवार का काम देख सुनकर मैं आनंदित होते रहता था । कई आयोजनों में शामिल भी हुआ करता था। परिवार के आयोजन में शामिल होने पर कुछ अलग ही अनुभूति होती थी। बहुत से छोटे बड़े मंचों से काव्य पाठ किया है। यहाँ तक की आकाशवाणी पर भी काव्य पाठ किया है, पर परिवार पटल पर जब भी मौका मिला वह अतुलनीय था। इसलिए जैसे ही पं.शिवप्रकाश जौनपुरी ने प्रस्ताव दिया, मैने बिना हीलाहवाली के स्वीकार कर लिया। आज परिवार में पदाधिकारी के रूप में जुड़कर भाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ। मैं परिवार के सभी सदस्यों को धन्यवाद देता हूँ और वादा करता हूँ कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने का सदैव प्रयास करूँगा।

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