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काव्यसृजन का संगीत एवम भजन संध्या का अविस्मरणीय आयोजन

  • रा.सा.सा.व सांस्कृतिक संस्था ‘काव्य सृजन’ द्वारा एक बहुत ही व सफल एवम यादगार आयोजन सुगम गीत – संगीत एवम भजन संध्या का आयोजन रमेश महेश्वरी “राजहंस” की अध्यक्षता , डॉ श्रीहरि वाणी के मार्गदर्शन तथा पं.शिवप्रकाश जौनपुरी के संयोजन व डॉ रश्मिलता मिश्रा के उत्कृष्ट संचालन में सम्पन्न हुआ।
    इस आयोजन में देश के कई भागों से लोग सहभागी बने और अपने स्वर में चुनिंदा भजन प्रस्तुत कर सभी को आनंदित तथा भाव विभोर कर दिया।
    यह आयोजन गूगल मीट पर ऑनलाइन किया गया।आयोजन की विशेषता यह रही कि आयोजन की शुरुआत शंख व घंटी ध्वनि से की गई।
    पं. शिवप्रकाश जौनपुरी एवम डॉ श्रीहरि वाणी ने शंख बजाया, किसी ने घण्टी तो किसी ने ताली बजायी कुछ लोग उत्साह में हर हर महादेव का जयघोष करते दिखे।
    आज के इस अविस्मरणीय आयोजन में अरुण दूबे। “अविकल” ने शिव भजन सुनाकर लोगों को आनंदित किया तो अरुण दीक्षित ने रामजी को आवाज लगाई, इसी तरह मनिंदर सरकार ने हरि भजन की उत्कृष्ट प्रस्तुती कर भावविभोर कर दिया , संगीता शुक्ला जो आयीं तो श्रोता बन कर थीं पर आग्रह पर अपने सुन्दर स्वर में राम रतन धन पायो.. की भावभीनी प्रस्तुति दी , शारदाप्रसाद दुबे ने राम जी को पुन:जगाने का भरपूर सफल प्रयास किया । इसी प्रकार पवन कुमार मिश्र ने अपनी दादी द्वारा सिखाया गया सुन्दर भजन प्रस्तुत किया , पूनम शर्मा ने शिव जी को तो सुमन प्रभा ने भी सुमधुर भजन प्रस्तुत कर संध्या को खूब महकाया। श्रीधर मिश्र ने आत्मा से परमात्मा का मेल कराया तो, डॉ रश्मिलता मिश्रा ने शिवजी का डमरू खूब बजाया , सौरभ दत्ता ने बांग्ला भाषा में भजन प्रस्तुत किया तो मनोज मिस्त्री भी अपनी छाप छोड़े , विनय शर्मा “दीप” जी ने ‘मइया को अपने दुवारे लगी नीम की छाँव तले’भोजपुरी भजन द्वारा बुलाया तो डॉ श्रीहरि वाणी ने अपनी सशक्त रचना द्वारा रामजी का वन्दन – अभिनंदन किया, अब बारी आई पं.शिवप्रकाश जौनपुरी की जो अपनी अवधी कहरवा से सबको विह्वल कर दिये। जब उन्होने अपनी भजन “सुधिया हम सबकी गइलअ का भुलाई हो,रघुराई काँहे नाही अइलअ ना” सुनाया।
    जब आयोजन के अध्यक्ष आदरणीय रमेश महेश्वरी “राजहंस” ने पूरे भक्ति भाव में डूब कर अपनी प्रस्तुति स्वरूप “ठुमकि चलत राम चंद्र, बाजत पैजनियाँ” भजन प्रस्तुत किया तो सभी लोग बरबस ही झूमते,आंनद के सागर में डूब ही गये और इस प्रकार आयोजन भी अपने चरम उत्कर्ष पर पहुँच गया।
    कई श्रोता भी इस भजन संध्या का भरपूर आनंद ले रहे थे जिसमें प्रमुख रूप से छत्तूलाल खुन्टे , ललिता अग्रवाल , सौरभ पाण्डेय आदि रहे।
    सबके नाम तो लिख नहीं सकता लेकिन जिनके पुण्य आज जागृत थे, वे सब इस सुगम गीत – संगीत – भजन संध्या का भरपूर आनंद लिए और जीवन को सफल बनाये।
    अपने अध्यक्षीय उद्वोधन में आदरणीय “राजहंस” ने संस्था द्वारा की गई इस पहल का अभिनंदन करते हुए मुक्तकंठ से सराहना की और कहा कि इस अवसाद ग्रस्त समय में जिस तरह से ‘काव्य सृजन परिवार’ नित नये आयोजन कर लोगों को अवसाद से बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है वह अतुलनीय है।
    अंत में संस्था के उपाध्यक्ष पं.श्रीधर मिश्र ने सभी का आभार ज्ञापित करते हुए निवेदन किया कि आप सब हमारी ताकत हो, आप से ही हम हैं ,इसलिए आप सब सदैव हमारा साथ यथोचित देते रहें, आप सबका अभिनंदन है..वंदन है।

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