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आन मिलो अब श्याम

 

आन मिलो अब श्याम यही कह,
प्रीतम आज बुलाती है ।
बाट निहारत नैनन से नित,
अँसुवन नीर बहाती है ।
नीर भरन जब जाय रही वह ,
छलकत गागर जाती है ।
श्याम बजावत बाँसुरिया जब ,
तान उसे तड़पाती है ।।

कृष्ण मयी यह सृष्टि चराचर ,
पूजन ध्यान लगाओ रे ।
तारण हार वही भव सागर ,
चरणन माथ नवाओ रे ।
प्रीत भरे कुछ गान सुनाकर ,
नटखट श्याम रिझाओ रे ।
पाय कृपा प्रभु दर्शन की तब ,
जीवन पार लगाओ रे ।।

आवत है ऋतु राज धरा तब ,
जीव सभी हरषाते हैं ।
कानन कोयल कूकत है जब ,
प्रेम भरे मन भाते हैं ।
निर्मल होय निशा अति सुंदर ,
चाँद सुधा बरसाते हैं ।
रंग बिरंग खिले जब पुहुपन ,
बागन को महकाते हैं ।।

इन्द्राणी साहू”साँची”
भाटापारा( छत्तीसगढ़)

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